चहेते शिक्षक को देख भोजन की थालियां छोड़ दौड़े बच्चे, गले से लिपट गए, छात्रों के प्यार ने लौटाया उनका टीचर

चहेते शिक्षक को देख भोजन की थालियां छोड़ दौड़े बच्चे, गले से लिपट गए, छात्रों के प्यार ने लौटाया उनका टीचर



मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के सेगांव स्थित शासकीय सांदीपनि प्राथमिक विद्यालय में एक भावुक दृश्य देखने को मिला, जब शिक्षक नटवर पाटीदार की बहाली के बाद बच्चों ने उन्हें गले लगाकर स्वागत किया। शिक्षक के विद्यालय परिसर में प्रवेश करते ही मध्याह्न भोजन कर रहे बच्चे थालियां छोड़कर दौड़ पड़े और अपने प्रिय शिक्षक को गले लगा लिया।

दरअसल यह बहाली बच्चों और पेरेंट्स के आंदोलन का परिणाम रही, जब विद्यालय के 200 से अधिक बच्चे और उनके अभिभावक करीब 35 किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए शिक्षक की वापसी की मांग लेकर निकले थे। आंदोलन के दौरान जिला प्रशासन ने मामले पर पुनर्विचार का आश्वासन दिया था। इसके बाद शिक्षक नटवर पाटीदार का अटैचमेंट आदेश निरस्त कर दिया गया, जिससे वे लंच ब्रेक के दौरान पुनः अपने मूल विद्यालय में कार्यभार ग्रहण कर सके।

शिक्षिका से कथित विवाद के चलते हटाया था

उन्हें स्कूल में एक शिक्षिका से कथित विवाद के चलते आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त इकबाल हुसैन आदिल ने हटाकर अटैच कर दिया था। अब उसी अधिकारी ने कलेक्टर भव्या मित्तल के निर्देश पर उनकी वापसी की।


यह दृश्य कल्पना से परे है था

अपनी वापसी के क्षण को याद करते हुए शिक्षक पाटीदार ने कहा कि वह दृश्य कल्पना से परे और अत्यंत भावुक था। उन्होंने बताया, 'जैसे ही मैं स्कूल परिसर में पहुंचा, भोजन कर रहे बच्चे अपनी थालियां वहीं छोड़कर मेरी ओर दौड़े और मुझे गले लगा लिया। वह पल मेरे जीवन का अविस्मरणीय क्षण है।'


35 किलोमीटर पैदल चलकर गए थे बच्चे-अभिभावक

पाटीदार ने यह भी कहा कि उन्हें इस स्तर के आंदोलन की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। 28 जनवरी को बच्चों और अभिभावकों द्वारा लगभग 35 किलोमीटर पैदल चलकर खरगोन में कलेक्टर भव्या मित्तल से मिलने की कोशिश का स्वतःस्फूर्त निर्णय था। शिक्षक ने स्पष्ट किया कि शासन के अटैचमेंट आदेश के पालन में उन्होंने दसनवाल में नई पदस्थापना पर ज्वाइन भी कर लिया था, लेकिन बच्चों और अभिभावकों के पैदल मार्च के बाद प्रशासन ने पूरे मामले की समीक्षा कर आदेश वापस ले लिया।


मोटिवेशनल कक्षाएं और क्वालिटी एजुकेशन है पहचान


पाटीदार का प्रभाव केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने बताया कि सांदीपनि विद्यालय में पदस्थापना के दौरान शैक्षणिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए विशेष मोटिवेशनल कक्षाएं संचालित की गईं। इसके अलावा विद्यार्थियों को नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा की भी तैयारी कराई गई, जो क्वालिटी एजुकेशन के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा, 'स्कूल समय के बाद भी मैं शाम 6 से 8 बजे तक घर पर नि:शुल्क अतिरिक्त कक्षाएं लेता था।


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