सरकारी कर्मियों को संपत्ति का देना होगा ब्योरा
जिले में सेवारत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी चल-अचल संपत्ति एवं आय के स्रोतों का पूरा विवरण 15 फरवरी तक अनिवार्य रूप से ऑनलाइन प्रस्तुत करना होगा। यह निर्देश भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जारी किया गया है। ट्रेजरी विभाग द्वारा इसके लिए ऑनलाइन प्रक्रिया निर्धारित की गई है, जिसमें संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी संपत्ति
का विस्तृत ब्योरा दर्ज करना होगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा तक संपत्ति का ब्योरा प्रस्तुत नहीं करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन अस्थायी रूप से रोक दिया जाएगा। इस फैसले के दायरे में बिहार सरकार के 8 लाख से अधिक अधिकारी और कर्मचारी आएंगे। विभाग का कहना है कि यह कदम केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आय और संपत्ति के बीच सामंजस्य की जांच की दिशा में एक अहम पहल है
समय पर ब्योरा नहीं देने पर चार्जशीट तक की कार्रवाई
यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी 28 फरवरी तक भी संपत्ति का ब्योरा देने से चूकता है, तो उसके खिलाफ 27 अगस्त 2021 को जारी अधिसूचना के तहत कार्रवाई की जाएगी। पहले चरण में वेतन रोका जाएगा, इसके बाद संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। नोटिस का जवाब नहीं देने या फिर इसके बावजूद संपत्ति का ब्योरा प्रस्तुत नहीं करने की स्थिति में संबंधित कर्मचारी के खिलाफ चार्जशीट तैयार की जाएगी। चार्जशीट के आधार पर विभागीय कार्यवाही शुरू होगी और दोषी पाए जाने पर कर्मचारी को दंडित
किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इस सख्ती का उद्देश्य कर्मचारियों में भय पैदा करना नहीं, बल्कि उन्हें समय पर अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करना है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह पहल जिले और राज्य स्तर पर पारदर्शिता बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति उनकी घोषित आय से मेल खाती है या नहीं। साथ ही यह व्यवस्था भ्रष्टाचार को रोकने और नवाबदेही तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका sh @pravesh
