प्रतिदिन ई-शिक्षाकोष पर दें मध्याह्न भोजन का आंकड़ा
जिले के प्रारंभिक स्कूलों में संचालित एमडीएम का आंकड़ा अब हर दिन स्कूल प्रधान को ई शिक्षकोष पर अपलोड करना होगा।
स्कूलों में संचालित एमडीएम में पारदर्शिता लाने के लिए विभाग की ओर से यह कदम उठाया गया है जिले के कई स्कूलों में स्कूल प्रधानों की ओर से एमडीएम का आंकड़ा ई शिक्षा कोष पर नहीं अपलोड किया जा रहा है। लिहाजा मध्याह्न भोजन योजना की रिपोर्ट अब प्रतिदिन शाम 4:00 बजे से पहले शिक्षा कोष पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। इसको लेकर शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी विद्यालयों को निर्देश जारी किया है। इसमें प्रत्येक कार्य दिवस में दोपहर बाद शाम 4:00 बजे से पहले ई शिक्षा कोष पोर्टल पर मध्याह्न भोजन व संबंधित गतिविधियों के ऑनलाइन रिपोर्ट रिपोर्ट अनिवार्य रूप से दर्ज करने को कहा गया है। इसके माध्यम से विद्यालयों की उपस्थिति,
भोजन वितरण व परिवर्तन मूल्य की मॉनिटरिंग की जा सकेगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो विद्यालय 4:00 बजे के बाद आंकडे दर्ज करेंगे उन्हें परिवर्तन मूल्य भुगतान नहीं किया जायेगा। साथ ही गलत प्रविष्टि, स्कूल को बाधित दिखने या फर्जी आंकड़ा अपलोड करने पर प्रधानाध्यापक व जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात भी कही है। शिक्षा विभाग ने कहा है कि शिक्षा कोष पर प्राप्त दैनिक रिपोर्ट की वीडियो कांफ्रेंस
के माध्यम से समीक्षा के दौरान पाया कि कई विद्यालय मध्याह्न भोजन योजना की रिपोर्ट अधूरी भेजते हैं, अथवा समय पर अपलोड नहीं करते हैं। इतना ही नहीं कुछ विद्यालय तो आधी रात के बाद भी रिपोर्ट भेजते हुए पाये गये। जिसके कारण इसका असर भोजन वितरण व भुगतान प्रक्रिया पर भी पड़ता है। इस पूरी प्रक्रिया को बेहतर बनाने को लेकर यह कदम उठाया गया है। मध्याह्न भोजन निदेशक ने इसको लेकर पत्र जारी किया है। जारी पत्र में निदेशक ने
कहा है कि प्रत्येक दिन विद्यालय में उपस्थित कक्षा एक से आठवीं तक के एमडीएम का लाभ लेने वाले बच्चों का डाटा एप पर डाला जाना अनिवार्य है। स्कूल में एमडीएम बना या नहीं, इसका कारण और खाद्यान्न की उपलब्धता का ब्योरा तथा वेंडर द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्री की गुणवत्ता की जानकारी भी अनिवार्य रूप से दी जाएगी। साथ ही एमडीएम बनाये जाने वाले स्कूलों में एलपीजी उपलब्ध है या नहीं इसकी भी जानकारी देनी है।
जिले के 1632 स्कूलों में एमडीएम
संचालित : जिले के 1632 प्रारंभिक स्कूलों में फिलहाल एमडीएम का संचालन किया जा रहा है। जिसमें शहरी क्षेत्र में करीब 100 विद्यालय में एनजीओ के माध्यम से एमडीएम का संचालन किया जा रहा है, जबकि ग्रामीण इलाकों में स्कूलों में एमडीएम पकाया जा रहा है और वहीं बच्चों को वितरण किया जा रहा है।
