बिहार मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त 1637 मदरसे के 9822 टीचर को 14 साल से वेतन नहीं मिला

 बिहार मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त 1637 मदरसे के 9822 टीचर को 14 साल से वेतन नहीं मिला



बिहार मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त 1637 मदरसों के 9822 शिक्षकों को वेतन नहीं मिल रहा है। बिना वेतन के ही 2013 से छात्रों को पढ़ा रहे हैं। बोर्ड से लेकर शिक्षा विभाग और जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय तक शिक्षक चक्कर लगाकर थक हो चुके हैं पर उनका कोई सुध लेने वाला नहीं है। इन शिक्षकों के परिवार के करीब 50 हजार लोग जैसे-तैसे जिदंगी गुजार रहे हैं। इन मदरसों की फाइल बोर्ड, शिक्षा विभाग और जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय में धूल फांक रही है। ये 1637 मदरसे बिहार के सभी जिलों में हैं। इनमें 95 प्रतिशत मदरसे वस्तानिया यानी आठवीं क्लास तक के हैं जबकि 5 प्रतिशत मदरसे फौकानिया यानी मैट्रिक लेवल के हैं। बोर्ड बार-बार इन टीचरों को भरोसा दे रहा है कि अब हो जाएगा पर कुछ नहीं हुआ। टीचर इन्हीं मदरसों के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर 4-5 हजार कमाकर परिवार का लालन-पालन करने पर मजबूर हैं।

1987 में सरकार ने दी थी 2460 मदरसों को मान्यता, 823 मदरसों के टीचर को मिल रहा वेतन

मदरसा के शिक्षक इमरान सिद्दीकी ने बताया कि बिहार सरकार ने 1987 में एक साथ बिहार के 2460 मदरसों को बोर्ड से मान्यता दी। सरकार ने 2005 में इन मदरसों

के शिक्षकों को वेतन देने की घोषणा की। 15 फरवरी 2011 को कैबिनेट कर सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया कि इन सभी 2460 मदरसों के डीईओ से जांच के बाद टीचरों को वेतन दिया जाएगा। 2013 में 205 मदरसों के टीचर को वेतन मिलने लगा। 2015 में 609 मदरसों को और उसके कुछ साल के बाद लड़कियों के 9 मदरसों को अनुदान दिया गया पर 1637 मदरसे लटक
कर रह गए। शिक्षकों ने बताया कि इन 1637 मदरसों को डीईअओ के लेवल से कई बार जांच हो हुई कि मदरसे में कितने कमरे हैं? कितने एराजी में बने हैं? कितने टीचर हैं? आधारभूत संरचना कैसी है? इन जांचों के बाद डीईओ ने फाइल बोर्ड को भेज दी है। डीईओ ने अपने स्तर पर भी तीन-तीन बार जांच की पर फाइल अटकी रही। यही नहीं हाईकोर्ट के आदेश के बाद जांच हुई
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