पटना। राज्य में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों के रिटायरमेंट के साथ ही उनके पद भी समाप्त हो जायेंगे। इसके साथ ही स्कूली शिक्षा व्यवस्था में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी वाले दिन बीते दिनों की बात बन कर रह जायेगी। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी की जगह सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी लेने वाले हैं, जो प्रोन्नत होकर शिक्षा विकास पदाधिकारी के पद तक जायेंगे। इसके लिए बिहार शिक्षा प्रशासन संवर्ग नियमावली, 2025 पर कैबिनेट की मुहर लग चुकी है। इस पर अमल के साथ ही प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी वाली व्यवस्था बदलनी शुरू हो जायेगी। स्कूलों के निरीक्षण तंत्र का नया ढांचा खड़ा होना शुरू हो जायेगा।
स्कूली शिक्षा में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी की - व्यवस्था की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। प्रखंड स्तर पर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी शिक्षा के सबसे बड़े अधिकारी होते हैं। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों के पचास फीसदी पदों पर सीधी नियुक्ति एवं शेष पचास फीसदी पदों को राजकीय बुनियादी विद्यालयों के निम्न शिक्षा सेवा संवर्ग के शिक्षकों की प्रोन्नति से भरने की व्यवस्था रही है। लेकिन, वर्ष 1991 के बाद प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों के पदों पर सीधी बहाली नहीं हुई। उधर, राजकीय बुनियादी विद्यालयों में भी निम्न शिक्षा सेवा संवर्ग के शिक्षक रिटायर करते चले गये। नतीजतन, वर्तमान में राज्य के सभी 534 प्रखंडों में
से तकरीबन पचास फीसदी पद खाली हैं। इसके चलते एक प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को एक से अधिक प्रखंडों के अतिरिक्त प्रभार दिये गये। लेकिन, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य शिक्षा सचिव की कुर्सी संभालने के बाद डॉ. एस. सिद्धार्थ के निर्देश के अनुरूप प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के खाली पदों के अतिरिक्त प्रभार में प्रखंड स्तरीय दूसरे विभागों के निरीक्षण अधिकारी चल रहे हैं।
हालांकि, वर्ष 2005 में मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार के राज्य की सत्ता संभालने के बाद शिक्षा विभाग ने शिक्षा व्यवस्था का प्रशासनिक ढांचा दुरुस्त करने के लिए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के पदों को बिहार शिक्षा सेवा के प्रशासन संवर्ग में शामिल करने की योजना बनायी थी। इसके पीछे यह तर्क दिया गया था कि जब प्रखंड स्तर पर पदस्थापित प्रखंड विकास पदाधिकारी बिहार प्रशासनिक सेवा संवर्ग के होते हैं।
