सवालों का हल निकाल रहा शिक्षा विभाग

 सवालों का हल निकाल रहा शिक्षा विभाग



पटना। शिक्षा विभाग सवालों को हल कर रहा है। सवालों को हल करने में निदेशालयों के सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों से लेकर निदेशक तक लगे हैं।


सवाल भी भांति-भांति के हैं, जो शैक्षिक व्यवस्था, शिक्षण संस्थानों की स्थिति, शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों की बहाली, वर्तमान में कार्यरत विभिन्न कोटि के शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी एवं प्रधानाध्यापकों की समस्याओं से जुड़े हैं। ये सारे सवाल बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों बिहार विधान सभा एवं बिहार विधान परिषद में सदस्यों द्वारा उठाये गये हैं, उठाये जाने वाले हैं। बिहार विधान मंडल का चल रहा बजट सत्र तो दो फरवरी से शुरू हुआ, लेकिन उसमें उठाये जाने वाले सवालों का उत्तर बनाने में विभाग तकरीबन पंद्रह दिन पहले से लग गया था। ये सभी सदस्यों द्वारा पूछे


जाने वाले वैसे सवाल थे, जो संबंधित समिति से स्वीकृत होकर पहले ही आ जाते हैं, ताकि सदन में तय तिथि को सरकार की ओर से उसके जवाब दिये जा सकें। इसकी समीक्षा भी विभिन्न स्तरों पर पहले से होने लगी। जिन कोटि के सवाल पूछे जाते हैं, उसमें ध्यानाकर्षण, तारांकित, अतारांकित, अल्पसूचित, संकल्प एवं याचिका के सवाल होते हैं। इन कोटियों के सवाल तय प्रक्रिया के तहत पूछे जाते हैं और जवाब भी तय प्रक्रिया के तहत ही दिये जाते हैं। तारांकित प्रश्न लिखित पूछे जाते हैं और उसके जवाब भी सदन में लिखित दिये जाते हैं। अतारांकित प्रश्नों के जवाब पूछने वाले सदस्यों को उपलब्ध कराये जाते हैं। अल्प सूचना पर पूछे जाने वाले सवाल अल्पसूचित कोटि में आते हैं। ध्यानाकर्षण लिखित होता है और उसके उत्तर के लिए सरकार द्वारा वक्तव्य दिये जाते हैं। संकल्प में भी सरकार की ओर वक्तव्य


दिये जाते हैं। याचिका में सदस्यों के आवेदन सदन के माध्यम से अग्रसारित किया जाता है। सरकार जवाब देती है। इसके साथ ही सदस्यों द्वारा शून्यकाल में सवाल उठाये जाते हैं। वैसे सवाल, जिनका संबंध राज्य मुख्यालय से होता है, के जवाब में ज्यादा माथापच्ची की जरूरत नहीं होती है। ज्यादा माथापच्ची की जरूरत उन सवालों के जवाब में पड़ती है, जो शिक्षा विभाग के प्रमंडल, जिला एवं प्रखंड कार्यालय से जुड़े होते हैं। उन कार्यालयों से तथ्यों की जानकारी लेनी होती है। उसके बाद ही जवाब मुकम्मल होता है।


बहरहाल, सवालों के जवाब को लेकर शिक्षा विभाग के सभी संबंधित कर्मचारी-अधिकारी व्यस्त हैं। सवालों को हल करने की व्यस्तता से अधिकारी-कर्मचारियों को सत्र समाप्ति के साथ ही राहत मिलेगी। बावजूद, बचे सवालों के उत्तर तो उन्हें तलाशने ही होंगे।

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