स्कूलों में कुत्ते भगाने के लिए बनेंगे नोडल शिक्षक

 स्कूलों में कुत्ते भगाने के लिए बनेंगे नोडल शिक्षक



शिक्षा विभाग अपने अजीबोगरीब न आदेशों को लेकर एक बार फिर चर्चा में । है। पहले खुले में शौच करने वालों का फोटो लेने व शराबियों की निगरानी जैसे वे निर्देश दिया गया था। अब शिक्षकों को आवारा कुत्तों से निपटने की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। स्कूल से कुत्ते भगाने को । लेकर चार माह में तीन बार शिक्षा विभाग ने निर्देश जारी किया है।


पहले व दूसरे निर्देश 2025 में अवारा कुत्तों से बच्चों को बचाने के लिए दिया गया था। अब नया निर्देश फरवरी में कुत्ते भगाने के एचएम को नोडल शिक्षक बनाने के लिए दिया गया है। जिले के सरकारी स्कूलों के शिक्षक असमंजस में हैं कि वे बच्चों को पढ़ाएं या कुत्तों को भगाने का काम करें। सरकारी स्कूलों को पत्र जारी कर निर्देश दिया गया है कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को आवारा कुत्तों से सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। जिले के 1500 प्राइमरी व मिडिल स्कूलों को निर्देश दिया गया है। आदेश में कहा गया है कि स्कूल प्रबंधन यह



भारत सरकार के पत्रके आधार पर निर्देश जारी

विद्यालय परिसर में ऐसी कोई जगह न बनने दी जाए जहां कुत्ते आकर बैठें या गंदगी फैलाएं। स्कूल से निकलने वाले अवशिष्ट पदार्थ और खाने-पीने का कचरा परिसर के बाहर निर्धारित कूड़ेदान में फेंका जाए, ताकि कुत्ते स्कूल की ओर आकर्षित न हों। यह निर्देश मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार के पत्र के आधार पर जारी किया गया है।


सुनिश्चित करे कि कुत्ते स्कूल परिसर या उसके आसपास न भटकें। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय में एक नोडल शिक्षक नामित किया जाएगा, जो इस व्यवस्था की निगरानी करेगा। शिक्षकों ने कहा कि क्या अब क्लास की घंटी की तरह कुत्ते भगाने की भी घंटी स्कूलों में लगेगी। स्कूल परिसर में एक अलग कुर्सी इसके लिए शिक्षकों की लगाई जाएगी। शिक्षक नेता डॉ. रविशंकर ने कहा कि यह निर्देश ठीक नहीं है।

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