वित्तरहित स्कूलों और कालेजों के लिए यथाशीघ्र होगा वेतनमान का निर्धारण
वित्तरहित स्कूलों और कालेजों के शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों के वेतनमान के निर्धारण के लिए सरकार गंभीरता से प्रयास कर रही है। इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। समिति की अनुशंसाओं पर सरकार उचित निर्णय लेगी। मंगलवार को शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने विधान परिषद को इसकी जानकारी दी।
नवल किशोर यादव और जीवन कुमार के गैर-सरकारी संकल्प का उत्तर देते हुए शिक्षा मंत्री ने वित्त रहित स्कूलों-कालेजों को दिए जा रहे अनुदान की वर्तमान व्यवस्था से अवगत कराया, जिसका निर्धारण परीक्षाफल के आधार पर होता है। इसी के साथ उन्होंने बताया कि माध्यमिक विद्यालयों को 394 करोड़ का अनुदान हाल-फिलहाल दिया गया है। वह शैक्षणिक सत्र 2015 से 2019 के एवज में है। 2014 2017 के लिए कालेजों को बतौर अनुदान 245 करोड़ रुपये दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि बिहार
इसके लिए बनाई गई मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति, बैठक यथाशीघ्र, समिति की अनुशंसाओं पर सरकार लेगी उचित निर्णय
में एक हजार से अधिक वित्तरहित स्कूल-कालेज हैं, जो शिक्षकों आदि को वेतन सरकार से मिलने वाले अनुदान से देते हैं। बीच-बीच में नवल किशोर बहुत टोकाटाकी किए। वे जानना चाह रहे थे कि समिति की बैठक कब होगी। मंत्री ने बताया कि बैठक यथाशीघ्र होगी। इसके बाद भी टोकाटाकी होने पर आसन ने मतदान कराने की हिदायत दी। अंततः उन्होंने अपना संकल्प वापस ले लिया।
वेतनमान निर्धारित होते ही एक साथ मिलेगा तीन माह का वेतन
डा. संजीव कुमार सिंह का गैर-सरकारी संकल्प राजकीयकृत व प्रोजेक्ट विद्यालयों के शिक्षकों की तरह ही अराजकीय मदरसा एवं संस्कृत विद्यालयों में वेतन-संरचना से संबंधित था। अनुकपा पर नियुक्त वैसे लगभग छह हजार शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने का उन्होंने मुद्दा उठाया। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि वेतन संरचना से संबंधित फाइल वित्त विभाग पास है। उसके अपर मुख्य सचिव से उनकी बात हुई है। उनसे संबंधित फाइल सप्ताह भीतर मांगी गई है। वेतनमान का निर्धारण हो जाने पर एक साथ तीन माह के वेतन का भुगतान कर दिया जाएगा।
