BPSC TRE बहाली में पोस्टिंग गड़बड़ी से शिक्षक परेशान, जिला स्तर पर स्थानांतरण की मांग तेज
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की शिक्षक बहाली परीक्षा (TRE) के तहत बड़े पैमाने पर नियुक्तियां हुईं। शिक्षा विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव (ACS) के.के. पाठक के नेतृत्व में बहाली प्रक्रिया तेज़ी से पूरी की गई, जिसे एक बड़ी प्रशासनिक उपलब्धि माना गया। लेकिन अब उसी तेजी का खामियाजा हजारों शिक्षक भुगतते नजर आ रहे हैं।
बहाली के बाद पोस्टिंग प्रक्रिया में कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। एक ओर जहां बड़ी संख्या में शिक्षकों को दूसरे जिलों में पदस्थापित किया गया, वहीं दूसरी ओर एक ही जिले के भीतर भी असंतुलित और अव्यवस्थित पोस्टिंग देखने को मिली। कई महिला शिक्षकों को अपने ही जिले में दूर-दराज के प्रखंडों और स्कूलों में भेज दिया गया, जिससे उन्हें आवागमन और पारिवारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इतना ही नहीं, कई स्थानों पर एक ही विषय के जरूरत से ज्यादा शिक्षक तैनात कर दिए गए, जबकि अन्य विषयों में शिक्षक संकट बना हुआ है। विशेष परिस्थितियों से ग्रसित शिक्षक—जैसे गंभीर बीमारी, दिव्यांगता या पारिवारिक दायित्व वाले—भी अपने ही जिले में दूरस्थ विद्यालयों में पदस्थापित हैं और लंबे समय से स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
शिक्षकों की इन समस्याओं को देखते हुए पूर्व ACS एस सिद्दार्थ ने जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्थापना समिति के गठन का निर्देश दिया था, ताकि जिले के भीतर मानवीय और व्यावहारिक आधार पर स्थानांतरण हो सके। लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश जिलों में यह समिति अब तक सक्रिय नहीं हो पाई है।
समिति के निष्क्रिय रहने से शिक्षकों में भारी निराशा और असंतोष है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि नई स्थानांतरण नीति लागू करने से पहले एक बार समान जिले के शिक्षकों को भी स्थानांतरण का अवसर दिया जाना चाहिए, ताकि पहले से हुई त्रुटियों का सुधार हो सके।
शिक्षकों का मानना है कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो यह स्पष्ट रूप से भेदभाव की श्रेणी में आएगा। अब सबकी निगाहें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस लंबित मुद्दे पर कब ठोस निर्णय लेते हैं।
