स्थानांतरित विद्यालयों में शिक्षकों का योगदान करना अब अनिवार्य
राज्य में सरकारी शिक्षकों का स्थानांतरित विद्यालयों में योगदान करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह प्रविधान शिक्षकों के अंतरजिला स्थानांतरण संबंधी उस मार्गदर्शिका में है, जो शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डा. बी. राजेन्दर के हस्ताक्षर से सभी जिलों को बतौर आदेश जारी किया गया है। दो टूक आदेश है कि सभी जिला द्वारा मार्गदर्शिका का अक्षरशः अनुपालन किया जाएगा। विद्यालय में योगदान न करने वाले शिक्षकों पर कठोर कार्रवाई होगी। सभी जिलों का इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार अब तक 23 जिलों में अंतरजिला स्थानांतरित शिक्षकों को विद्यालय आवंटित किया गया है। शिक्षकों द्वारा स्थानांतरित विद्यालयों में योगदान दिया जा रहा है। 12 जिले ऐसे हैं, जहां स्कूल आवंटन का कार्य प्रगति पर है। इनमें समस्तीपुर, भोजपुर, कटिहार, लखीसराय, जहानाबाद, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, खगड़िया, पश्चिमी चंपारण, सारण, सिवान और जमुई शामिल हैं। बाकी तीन जिलों में स्थानांतरित शिक्षकों को विद्यालय आवंटन का कार्य शुरू किया जा
रहा है। शिक्षकों को ई-शिक्षाकोष के माध्यम से विद्यालय आवंटित किया जा रहा है। अंतरजिला स्थानांतरण के लिए ई-शिक्षाकोष के माध्यम से 41,689 शिक्षकों ने आवेदन किया था, इनमें 27,171 शिक्षकों को जिला आवंटित किया गया था। इनमें 22,928 शिक्षकों द्वारा प्रखंडों के विकल्प दिए गए थे। इस बीच वैसे अंतरजिला स्थानांतरित शिक्षक परेशान नजर आ रहे हैं, जिन्हें विकल्प वाला प्रखंड तो मिल गया, लेकिन आवागमन की दृष्टि से उस प्रखंड में आवंटित विद्यालय की तुलना में वर्तमान पदस्थापन वाला विद्यालय उन्हें सुविधाजनक लग रहा है। ऐसे में वर्तमान पदस्थापन वाले विद्यालय में ही बने रहना चाहते हैं। अंतरजिला स्थानांतरण संबंधी मार्गदर्शिका में प्रविधान नहीं होने के कारण ऐसा संभव नहीं है।
