शिक्षकों का स्थानांतरित विद्यालयों में योगदान अनिवार्य
राज्य में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों का स्थानांतरित विद्यालयों में योगदान करना अनिवार्य है। यह प्रावधान शिक्षकों के अंतरजिला स्थानांतरण संबंधी उस मार्गदर्शिका में है, जो शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर के हस्ताक्षर से जारी है। इसमें दो टूक निर्देश है कि सभी जिला द्वारा मार्गदर्शिका का अक्षरशः अनुपालन किया जायेगा।
यह मार्गदर्शिका गत 20 नवंबर को ही जारी हुई। अब, जब स्थानांतरित शिक्षकों को पोस्टिंग के लिए स्कूल अवंटित किये गये हैं-किये जा रहे हैं, तो संबंधित शिक्षकों को स्थानांतरित विद्यालयों में योगदान अनिवार्य किया जा रहा है। इससे संबंधित आदेश संबंधित जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों द्वारा निर्गत किये गये हैं।
अब तक 23 जिलों में अंतरजिला स्थानांतरित शिक्षकों को स्कूल आवंटित किये जा चुके हैं। शिक्षकों द्वारा स्थानांतरित विद्यालयों में योगदान दिये जा रहे हैं। 12 जिले ऐसे हैं, जहां स्कूल आवंटन का कार्य प्रगति पर
है। इनमें समस्तीपुर, भोजपुर, कटिहार, लखीसराय, जहानाबाद, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, खगड़िया, पश्चिमी चंपारण, सारण, सीवान और जमुई शामिल हैं। बाकी तीन जिलों में स्थानांतरित शिक्षकों के विद्यालय आवंटन का कार्य शुरू हो रहा है। शिक्षकों को ई-शिक्षाकोष के माध्यम से स्कूल आवंटित किये जा रहे हैं। अंतरजिला स्थानांतरण के लिए ई-शिक्षाकोष के माध्यम से 41,689 शिक्षकों ने आवेदन किया था। इनमें 27,171 शिक्षकों को जिला आवंटित किया गया था। इनमें 22,928 शिक्षकों द्वारा प्रखंडों के विकल्प दिये गये थे।
इस बीच वैसे अंतरजिला स्थानांतरित शिक्षक परेशान नजर आ रहे हैं, जिन्हें विकल्प वाला प्रखंड तो मिल गया, लेकिन आवागमन की दूष्टि से उस प्रखंड में आवंटित स्कूल की तुलना में वर्तमान पदस्थापन वाला स्कूल ही उन्हें सुविधाजनक लग रहा है। ऐसे में वे वर्तमान पदस्थापन वाले विद्यालय में ही बने रहना चाहते हैं, लेकिन अंतरजिला स्थानांतरण संबंधी मार्गदर्शिका में प्रावधान नहीं होने की वजह से ऐसा संभव नहीं है।
