पकड़े जाने के डर से गायब हो गये प्रमाण पत्र बनवाने वाले 4300 दिव्यांग

 पकड़े जाने के डर से गायब हो गये प्रमाण पत्र बनवाने वाले 4300 दिव्यांग



ऑनलाइन दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने का नियम उन लोगों पर भारी पड़ गया, जो दिव्यांगता के मानक पर खरा न उतरने के बावजूद प्रमाण पत्र बनवा लेने की हसरत पाले बैठे थे। दिव्यांग न होने के बावजूद सेटिंग के जरिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन करने वाले आवेदकों को जब दस्तावेज के साथ विशेषज्ञ चिकित्सकों के सामने प्रस्तुत होने की नौबत आई तो जिले के करीब 4300 आवेदक गायब हो गये। इन आवेदकों की मेडिकल जांच करने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग राह देख

रहा है कि ये लोग बीते कई सालों से दस्तावेज के साथ हाजिर होने का नाम नहीं ले रहे हैं।

करीब पौने पांच साल पहले शुरू हुई थी ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधाः बिहार में दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए

66 ऑनलाइन आवेदकों की सेहत की जांच कराते हुए मानक के अनुसार दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने का लक्ष्य शत-प्रतिशत हासिल करने के लिए निर्देश जारी किया जा चुका है। इस साल तक सभी 52 हजार आवेदनों को निबटा दिया जाये। - डॉ. अशोक प्रसाद, सीएस, भागलपुर

ऑनलाइन होती है, इसलिए इसके लिए फोटो, हस्ताक्षर, निवास, जाति प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज अपलोड करने होते हैं। इसके तहत आवेदक को यूडीआईडी पर जाकर अपनी जानकारी भरने के बाद रजिस्टर करना होता है। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवेदन को

यूडीआईडी कार्ड मिल जाता है। उसके बाद आवेदन को अपने चयनित हॉस्पिटल में जाकर अपने दस्तावेजों की हार्ड कॉपी जमा करनी होती है। जमा करने के साथ ही आवेदक को मेडिकल जांच कराने

की तारीख मिल जाती है। चूंकि हर महीने के हरेक बुधवार व 15 व 30 तारीख को मेडिकल जांच होती है, इन दिन या तारीख पर पहुंचने के बाद आवेदन की मेडिकल जांच होती है। मानक पूरा होने के बाद दिव्यांगता प्रमाण पत्र मिल जाता है।

52 हजार लोगों ने किया आवेदनः सिविल सर्जन


सिविल सर्जन डॉ. अशोक प्रसाद ने बताया कि साल 2011 की जनगणना के अनुसार, जिले के करीब 60 हजार लोगों का दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनना चाहिए। इनमें 52 हजार लोगों ने आवेदन किया। 4300 आवेदक आवेदन करने के बाद अपनी दिव्यांगता की जांच कराने के लिए अस्पताल नहीं पहुंचे। माना जा रहा है कि गायब आवेदक वे लोग हैं जो कि दिव्यांगता के मानकों पर खरा नहीं उतरते थे और मंसूबा पाल रखे थे कि वे दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवा लेंगे। जब कड़ाई से जांच की बात हुई तो ये लोग गायब हो गये। वहीं जिला स्वास्थ्य समिति के आंकड़े बताते हैं कि जुलाई 2024 में जहां 52 हजार की तुलना में महज 28 प्रतिशत आवेदकों का ही दिव्यांगता प्रमाण पत्र बन पाया था, लेकिन आज की तारीख में ये आंकड़ा बढ़कर 42 प्रतिशत को पार कर चुका है।
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