स्कूलों में आईसीटी लैब सक्रिय नहीं तो कार्रवाई, ट्रैकर तैयार
आईसीटी लैब (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला) और स्मार्ट क्लास का लाभ बच्चों को नियमित नहीं मिला और लैब सक्रिय नहीं रहा तो संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (बीईपीसी) ने इसके लिए सख्त कदम उठाया है। परिषद ने लगभग चार हजार विद्यालय जहां लैब और स्मार्ट क्लासरूम की व्यवस्था की गई है वहां ट्रैकर से हर दिन की गतिविधियों पर नजर रखने की पहल की है।
राज्यभर के हजारों स्कूलों में राज्य शिक्षा विभाग ने बच्चों को तकनीक की बुनियादी जानकारी देकर उन्हें दक्ष बनाने के लिए आईसीटी लैब और कक्षा को रुचिकर बनाने के लिए स्मार्ट क्लासरूम
की व्यवस्था की है। लेकिन कई जिले के स्कूलों में आईसीटी लैब में नियमित कक्षाएं नहीं होती हैं। लेकिन अब इन चार हजार विद्यालयों के लिए तैयार किए गए ट्रैकर के माध्यम से इंस्ट्रक्टर को उपस्थिति दर्ज करनी होगी। इसके लिए ट्रैकर में विभिन्न तरह के मॉड्यूल जोड़े गए हैं। तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए तैयार शिक्षण सुविधाओं के
निष्क्रिय रहने की सूचनाओं के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाया है। यदि स्कूलों में बने आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लासरूम सक्रिय नहीं रहे, तो संबंधित विद्यालय प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। राज्य में अबतक 1987 विद्यालयों में आईसीटी लैब और 2739 में स्मार्ट क्लास की सुविधा स्थापित की जा चुकी है।
ट्रैकर पर रिपोर्ट देना होगा : नई
व्यवस्था के तहत हर स्कूल को दैनिक आधार पर इन कक्षाओं की गतिविधियों का विवरण दर्ज करना होगा। इसमें इंस्ट्रक्टर की उपस्थिति से प्रतिदिन कितने छात्रों ने सुविधाओं का लाभउठाया, यह बताना होगा। इंस्ट्रक्टर को नोटकैम एप से प्रतिदिन अपना फोटो अपलोड करना जरूरी होगा।
