मध्याह्न भोजन में जहर की आशंका, हंगामा

 मध्याह्न भोजन में जहर की आशंका, हंगामा



प्रखंड के दियारा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय बाबूपुर आदिवासी टोला में बुधवार को सुबह करीब 11 बजे मध्यान्ह भोजन के समय बच्चों को खाना का रंग नीला दिखा। वे हैरान हो गए कि कहीं भोजन में कुछ जहरीला पदार्थ तो नहीं मिला दिया गया है। यह सोचकर किसी बच्चे ने भोजन नहीं किया। कुछ बच्चों ने अपने अभिनभावकों को इसकी सूचना दे दी। सूचना मिलते ही अभिभावक पहुंच गए और हंगामा करने लगे। इसके बाद मध्यान्ह भोजन के लिए बना खाना बाहर फेंका गया। स्थानीय लोगों एवं जन प्रतिनिधियों ने समझा बुझाकर मामले को शांत कराया। हालांकि अभिभावक एवं बच्चे भी नाराज दिखे।

गुरुवार को इस बात की जानकारी मुखिया लक्ष्मण यादव सहित अन्य जन पहुंचे। समाज एवं शिक्षकों के साथ एक बैठक आयोजित की गई। जिसमें प्रधानाध्यापक से लोगों ने पूछा कि खाना में जहर था क्या, लेकिन प्रधानाध्यापक ने कहा ऐसी कोई बात नहीं बल्कि मुझे फंसाने का षडयंत्र रचा जा रहा है। जबकि लोगों ने सवाल किए कि यदि खाना में जहर नहीं था तो खाना फेंका क्यों गया। इसकी जांच होनी चाहिए, तब मामला शांत हुआ। मुखिया लक्ष्मण यादव तथा कई अभिभावकों का कहना था कि जहर नहीं था बल्कि खाने में नील मिल हुआ था। बीईओ बलदेव ठाकुर ने बताया जहर जैसी कोई बात नहीं था, चावल बनाने के समय नीला दिखने लगा। जिसके बाद उसे फेंक गया।

शिक्षक ने छात्रा से करायी उठक-बैठक, हुई बेहोश

गोपालपुर प्रखंड के आदर्श मध्य विद्यालय धरहरा में शिक्षक के द्वारा एक कक्षा की छात्रा को कठोर दंड देने का आरोप है। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक ने छात्रा से 200 बार उठक-बैठक करवाया। जिससे छात्रा बेहोश हो गई। घटना के बाद उसे मायागंज अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। घटना की सूचना पर परिजनों के द्वारा विद्यालय में जमकर बवाल भी किया गया।

मिली जानकारी के अनुसार आदर्श मध्य विद्यालय धरहरा की छात्रा अपनी सहेली छात्रा से वर्ग में बात कर रही थी।

आरोपी शिक्षक को मिलनी चाहिए सजा: परिजन


जब घटना की जानकारी परिजनों को मिली तो बच्चे के द्वारा बताया गया कि

आरोपित शिक्षक ने छात्रा से 100 से 200 बार उठक-बैठक करवायी, जिससे वह बेहोश हो गई और उठ बैठ भी नहीं पा रही है। परिजनों के द्वारा उसे निजी चिकित्सक के यहां दिखाया गया जहां से उसे प्राथमिक उपचार के बाद मायागंज भेज दिया गया। परिजनों ने बताया कि जिस तरह से हमारी बच्ची के साथ शिक्षक ने किया है या माफी योग्य नहीं है। आरोपी शिक्षक को सजा मिलनी चाहिए।

इसके लिए छात्रा को 100 बार उठक बैठक करने की सजा एक शिक्षक ने दी। जब छात्रा ने सजा कम करने को कहा तो

बढ़ाकर 200 बार उठक-बैठक करने को कह दिया। उठक-बैठक के दौरान वह बेहोश हो गई। छात्रा के बेहोश होने पर

दूसरे शिक्षक के द्वारा तत्काल एक शिक्षक के माध्यम से छात्रा को घर पहुंचाया गया। वहीं विद्यालय के प्रधानाध्यापक उमेश सिंह ने बताया कि मैं छुट्टी पर था, लेकिन मुझे सूचना मिली तो मैंने परिजनों से बात कर पहले छात्रा का समुचित इलाज कराने की सलाह दी है। इसके बाद जांच कर संबंधित शिक्षक पर कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि किस परिस्थिति में घटना हुई है विद्यालय पहुंचने के बाद ही बता सकते हैं। वही प्रखंड शिक्षा कार्यालय से घटना को लेकर के बी आसी से जानकारी मांगने की बात कही गई है।


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