बिना अनुमति के एक से अधिक शिक्षक को नहीं मिलेगा अवकाश

 बिना अनुमति के एक से अधिक शिक्षक को नहीं मिलेगा अवकाश



विद्यालय निरीक्षण के दौरान लगातार शिकायतें मिलने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी ने शिक्षकों द्वारा अत्यधिक आकस्मिक अवकाश लिए जाने पर सख्त रुख अपनाया है। डीईओ ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि अवकाश के कारण विद्यालयों में पठन-पाठन बाधित हो रहा है, जिससे छात्र-हित और पाठ्यक्रम पूरा करने का लक्ष्य प्रभावित हो रहा है।


ऐसी परिस्थिति में अवकाश स्वीकृति को लेकर नए निर्देश लागू कर दिए गए हैं, जिनका सभी प्रधानाध्यापकों और प्रधान शिक्षकों द्वारा अक्षरशः पालन अनिवार्य होगा। जारी आदेश के अनुसार प्राथमिक विद्यालय में एक दिन में केवल एक शिक्षक, जबकि मध्य और. अधिकतम दो शिक्षकों को ही आकस्मिक या विशेष अवकाश दिया जा सकेगा।


निर्धारित सीमा से अधिक अवकाश स्वीकृत करने के लिए प्रधानाध्यापक को जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) से पूर्व अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा। डीईओ ने निर्देश दिया है कि सामान्य परिस्थिति में बिना स्वीकृति कोई भी शिक्षक अवकाश पर नहीं जाएगा। विशेष आकस्मिकता की स्थिति में फोन या वाट्सएप पर सूचना देना अनिवार्य होगा। साथ ही, अवकाश आवेदन कम से कम एक दिन पहले देना होगा।


एक साल में 16 दिनों का ही मिलेगा


आकस्मिक अवकाशः आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी शिक्षक को एक वर्ष में अधिकतम 16 दिनों का आकस्मिक अवकाश ही मिलेगा। विशेष आकस्मिक अवकाश और अन्य अवकाशों को मिलाकर लगातार 12 दिनों तक ही छुट्टी दी जा सकती है। सभी प्रधानाध्यापकों को शिक्षकवार अवकाश पंजी का संधारण करना होगा। डीईओ ने चेतावनी दी है कि निर्देशों का उल्लंघन करने वाले प्रधानाध्यापकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

जिलेभर के सभी प्रारंभिक विद्यालयों में आज अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। निदेशक प्राथमिक शिक्षा सहिला ने डीईओ व डीपीओ को पत्र भेजकर कहा है कि संगोष्ठी का आयोजन दो प्रमुख थीम पर होगा।


थीम हैः- हर बच्चा होगा अब स्कूल का हिस्सा और निपुण बनेगा बिहार हमारा। संगोष्ठी के दौरान अभिभावकों को यह बताया जाएगा कि बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान बच्चों के भविष्य की मजबूत नींव है, जिसे सुदृढ़


विद्यालयों में अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी आजकरना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। विद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि अधिक से अधिक अभिभावकों की सहभागिता सुनिश्चित करें। शिक्षक बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धियां अभिभावकों को बताएं और यह भी समझाएं कि हर बच्चे की सीखने की गति अलग होती है,  इसलिए तुलना न करें।


बच्चों को प्रतिदिन विद्यालय भेजने, घर में पढ़ाई का माहौल बनाने और मोबाइल-टीवी के उपयोग को सीमित करने पर भी जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता पर अभिभावकों से चर्चा होगी। शिक्षकों को यह संदेश देने को कहा गया है कि सभी अभिभावक अपने बच्चों को भोजन करवाकर ही विद्यालय भेजें। संगोष्ठी की गतिविधियों की रिपोर्ट राज्य स्तर से उपलब्ध कराए गए गूगल फॉर्म में भरना अनिवार्य होगा।

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