प्रधानाध्यापकों व प्रधान शिक्षकों के योगदान की होगी समीक्षा
पटना (आशिप्र)। राज्य में 39,061 प्रधानाध्यापकों एवं प्रधान शिक्षकों के योगदान की अंतिम तिथि गुरुवार को समाप्त हो गयी। शिक्षा विभाग अब इस बात की समीक्षा करेगा कि प्रधानाध्यापक एवं प्रधान शिक्षक के पद पर कितने अभ्यर्थियों ने योगदान दिया।
बिहार लोक सेवा आयोग की अनुशंसा पर नियुक्त 5,728 प्रधानाध्यापकों को अपनी पोस्टिंग वाले नवस्थापित एवं उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालयों और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में योगदान की अंतिम तिथि 31 जुलाई थी। इसी प्रकार बिहार लोक सेवा आयोग की अनुशंसा पर ही नियुक्त 35,333 प्रधान शिक्षकों को अपने पोस्टिंग वाले प्राथमिक विद्यालयों में योगदान करने की भी अंतिम तिथि 31 जुलाई ही थी।
नवनियुक्त प्रधानाध्यापकों एवं प्रधान शिक्षकों को योगदान की तिथि से ही क्रमशः प्रधानाध्यापक एवं प्रधान शिक्षक का वेतन दिया जाना है। प्रधानाध्यापकों एवं प्रधान शिक्षकों के लिए तकनीकी योगदान अनिवार्य है। इसके लिए योगदान करने वाले प्रधानाध्यापकों एवं प्रधान शिक्षकों के सभी आवश्यक कागजात ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर अपलोड करने होते हैं।
इसके बाद तकनीकी योगदान की प्रक्रिया पूरी होती है।
प्रधान शिक्षकों की बात करें, तो बुधवार तक राज्य के विभिन्न जिलों में 10 हजार 166 प्रधान शिक्षकों की ही तकनीकी ज्वाइनिंग हो पायी है। समस्तीपुर और नवादा में एक भी प्रधान शिक्षक की तकनीकी ज्वानिंग नहीं हो पायी है। पटना जिले में 1851 प्रधान शिक्षकों में केवल नौ की ही तकनीकी ज्वाइनिंग हुई है। सबसे ज्यादा मधुबनी में 1349 प्रधान शिक्षकों में से 1059 की तकनीकी ज्वाइनिंग हो गई है। भागलपुर में 658 में आठ और मुजफ्पुरपुर में 1680 में 87 प्रधान शिक्षकों की तकनीकी ज्वानिंग की खबर है।
आपको याद दिला दूं कि राज्य में पहली बार राज्य के प्राथमिक स्कूलों में प्रधान शिक्षक के पद सृजित किये गये हैं। प्राथमिक स्कूलों में 1ली से 5वीं कक्षा की पढ़ाई होती है। इन स्कूलों के लिए बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा के आधार पर प्रधान शिक्षक का चयन किया गया है। इसके लिए आयोग द्वारा ली गयी परीक्षा में 36 हजार 947 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए। इनमें 36 हजार 92 अभ्यर्थियों की काउंसलिंग हुई, जिनमें 35 हजार 333 अभ्यर्थी योग्य पाये गये।
