एक स्कूल ऐसा भी... सिर्फ एक छात्र और पढ़ाने को सात शिक्षक
बेतिया। जिले के विद्यालयों में नए सत्र में नामांकन चल रहा है। विद्यालयों में शिक्षकों और बच्चों का अनुपात अभी भी पूरा नहीं हो सका है। जिले के अभी भी कई विद्यालयों में एक शिक्षक पर 100 से ज्यादा बच्चे हैं। जिले में एक विद्यालय ऐसा भी है जहां एक बच्चा ही नामांकित है और इस विद्यालय में फिलहाल सात शिक्षक कार्यरत है।
कुछ दिन पहले तक तो यहां 12 शिक्षक शिक्षिकाओं की नियुक्ति थी, लेकिन धीरे-धीरे शिक्षा विभाग ने यहां से शिक्षकों को निकलना शुरू किया और दूसरे जगह तबादला और प्रतिनियुक्ति करनी शुरू की फिर भी एक बच्चे के विद्यालय में सात शिक्षक ड्यूटी करने आते हैं। सुबह से शाम तक ड्यूटी करके वापस चले जाते हैं। बैरिया प्रखंड की बैजुआ ग्राम पंचायत में प्राथमिक विद्यालय अल्पाहा है, जहां जाने के लिए गंडक नदी को पार करना पड़ता है। इधर, बैजुआ पंचायत में
प्राथमिक विद्यालय अल्पाहा स्थित इस विद्यालय में छात्र-छात्राओं का नामांकन हर वर्ष काफी कम होता है। पिछले एक वर्ष से इस विद्यालय में मात्र एक बच्चे का नामांकन हुआ है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक मुरारी कुमार बताते हैं कि जिस एक बच्चे का इस विद्यालय में नामांकन हुआ था वह भी पिछले दो माह से नहीं आ रहा है। ऐसे में हम लोग विद्यालय में आकर सिर्फ बैठे रहते हैं। शिक्षक और विद्यालय के प्रधानाध्यापक विद्यालय में आकर बैठते हैं और वापस घर चले जाते हैं। दियरावर्ती क्षेत्र में पड़ने वाले इस विद्यालय में कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं है।
बिना बच्चों के आते हैं शिक्षक |
फिलहाल इस विद्यालय में 7 शिक्षक शिक्षिकाओं की नियुक्ति है। कुछ दिन पहले यहां पर 12 शिक्षक-शिक्षिकाओं की संख्या थी लेकिन शिक्षा विभाग ने तीन शिक्षकों का तबादला कर दिया और दो शिक्षकों की दूसरे विद्यालय में प्रतिनियुक्ति कर दी गई। अब ऐसे में सात शिक्षक यहां आकर बैठे रहते हैं।
एक कमरे का है विद्यालय ना बिजली ना शौचालय
विद्यालय में एक ही कमरा है उसी में एक बच्चा जो कभी विद्यालय आता था उसके अलावे शिक्षक और एचएम वहां बैठते हैं। विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने बताया कि पहले एक कमरा भी नहीं था सिर्फ एक झोपड़ी थी। लेकिन इधर एक कमरा बनवाया गया है। जबकि विद्यालय में अभी तक शौचालय की सुविधा नहीं है। जो शिक्षक या प्रधानाध्यापक विद्यालय आते हैं उन्हें भी शौचालय जाने के लिए सोचना पड़ता है। उन्होंने बताया कि पानी पीने के लिए चापाकल की सुविधा जरूर है लेकिन शौचालय नहीं होने से काफी परेशानी होती है।
गांव के बच्चे यूपी के विद्यालय में जाते हैं पढ़ने
विद्यालय के प्रधानाध्यापक मुरारी मुरारी कुमार बताते हैं कि पंचायत के लोगों को गंडक नदी को पार करके जाना पड़ता है, ऐसे में यहां के लोग अपना घर पास के ही उत्तर प्रदेश में भी बनाए हुए हैं। ऐसे में अपने बच्चों को यहां पढ़ाने के बदले उत्तर प्रदेश के विद्यालय में ही पढ़ाना उचित समझते हैं। इतना जरूर है कि लोग यहां पर खेती बाड़ी ही करते हैं। विद्यालय में नामांकन कराने के लिए पोषक क्षेत्र में कई घरों में जाकर प्रचार प्रसार किया गया, लेकिन अभी तक इसका कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है।
