राज्य के 183 स्कूलों के पास भवन नहीं; बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर... सर्वाधिक 34 विद्यालय मुजफ्फरपुर में

 राज्य के 183 स्कूलों के पास भवन नहीं; बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर... सर्वाधिक 34 विद्यालय मुजफ्फरपुर में



बिहार में 183 ऐसे सरकारी विद्यालय हैं जिनके पास अपना खुद का भवन नहीं है। यह विद्यालय या तो खुले मैदान में या पेड़ के नीचे राज्य के जिले में संचालित हो रहा है। ऐसे में यहां पढ़ने वाले बच्चों को ठंड, बरसात या गर्मी में खासी परेशानी उठानी पड़ती है। यह स्थिति तब है जब सरकार अपने बजट में सर्वाधिक 20 फीसदी शिक्षा पर खर्च करती है। इसका खुलासा तब हुआ जब आरटीआई कार्यकर्ता राकेश कुमार राय ने विभाग से इसका आंकड़ा मांगा। इन 184 विद्यालयों में सबसे अधिक मुजफ्फरपुर जिले में 34 विद्यालय खुले में संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा दरभंगा में एक, गया में 10, कटिहार में 6, खगड़िया में 4, किशनगंज में एक, लखीसराय में एक, मधेपुरा में 16, मधुबनी में 16, अरिया में 21, पूर्वी चंपारण में 12, सहरसा में 4, शेखपुरा में तीन, सीतामढ़ी में आठ, सिवान में 18 और सुपौल में 28 विद्यालय खुले में चल रहे हैं।  

3213 सरकारी स्कूल या तो किराए पर या किसी अन्य सरकारी भवन में चल रहे

राज्य में 3213 सरकारी विद्यालय या तो किराए पर चल रहे हैं या अन्य किसी सरकारी विभाग के भवन में संचालित हो रहे हैं। वर्तमान में राज्य में कुल 76073 सरकारी विद्यालय हैं। इनमें से 72860 विद्यालयों के पास अपना भवन है। 3213 विद्यालय में 2925 विद्यालय बिना किराए की अन्य बिल्डिंग में संचालित हो रहा है। वहीं 88 ऐसे विद्यालय हैं जो दूसरे विभाग के भवन में संचालित हो रहे हैं। वही 17 विद्यालय ऐसे हैं जो किराए के भवन में चलाए जा रहे हैं।

सरकार के दावों की पोल खुल रही

एक ओर राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुधारे करने के लिए लगातार शिक्षकों की बहाली कर रही है। पिछले एक दो वर्षों में ढाई लाख शिक्षकों की बहाली हुई है और जल्दी 90 हजार और शिक्षकों की बहाली होनी है। बच्चे स्कूल आएं, इसके लिए राज्य सरकार की ओर से कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही है। खाने से लेकर ड्रेस-किताबें सब मुहैया कराया जा रहा है। फिर भी भवन के अभाव में बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर है। कुछ स्कूलों में बारिश के दिनों में शिक्षक छतरी लेकर बच्चों को पढ़ाते हैं। गर्मी के दिनों में शिक्षकों और प्रधानाचार्य बच्चों को पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाते हैं।


बिहार के विभिन्न जिलों में ऐसे स्कूलों को चिन्हित किया जा रहा है, जो भवनविहिन हैं। छात्रों के मुताबिक कमरों की संख्या कम है, स्कूलों की बाउंड्री नहीं है। कई स्कूलों की पहचान भी हो चुकी है। अब चरणबद्ध तरीके से भवन, स्कूल में कमरा, बाउंड्रीवाल, शौचालय, पेयजल, ग्राउंड सहित अन्य कार्य कराया जाएगा। 50 हजार रुपए तक के काम प्रधानाचार्य खुद ही करा


सकेंगे। जबकि बड़ी राशि के काम मुख्यालय द्वारा कराया जाएगा। सुनील कुमार, शिक्षा मंत्री


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