स्कूल आवंटन की सूची वायरल मामले की होगी जांच, कई हो सकते निलंबित

 स्कूल आवंटन की सूची वायरल मामले की होगी जांच, कई हो सकते निलंबित

पटना : राज्य के सरकारी विद्यालयों में स्थानांतरित शिक्षकों के विद्यालय



आवंटन की सूची वायरल होने के मामले की जांच होगी। इसमें शामिल अधिकारी से लेकर कर्मचारियों पर निलंबन की गाज भी गिर सकती है। शिक्षा विभाग ने स्थानांतरण श्रेणी एक से छह तक के स्थानांतरित 26,665 शिक्षकों का विद्यालय आवंटन गुरुवार को किया था। विद्यालय आवंटन शिक्षा विभाग के ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर किया गया था। लेकिन, विद्यालय आवंटन की सूची वायरल हो गई। सूची के तकरीबन 35 पेज वायरल हुए हैं। सूची वायरल होने के मामले को शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डा.एस. सिद्धार्थ ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने यह पता लगाने का आदेश दिया है कि सूची कहां से और कैसे वायरल हुई? इसमें शामिल पाए जाने वाले अधिकारी-कर्मचारियों पर निलंबन की कार्रवाई भी हो सकती है। इस बीच अपने वर्तमान पदस्थापन वाले जिले के अंदर तबादला लेने वाले वैसे शिक्षक शिक्षा विभाग में पहुंचने शुरू हो गए हैं, जिन्हें वर्तमान पदस्थापन वाले के विद्यालय से भी ज्यादा दूरी पर विद्यालय आवंटित हो गया है। अब ऐसे शिक्षकों को यह लग रहा है कि जो विद्यालय उन्हें आवंटित हुआ है, उससे ज्यादा सुविधाजनक उनका वर्तमान पदस्थापन वाला विद्यालय ही है। इसके मद्देनजर ऐसे शिक्षक अब अपने वर्तमान पदस्थापन वाले विद्यालय में ही बने रहना चाहते हैं। फुलवारीशरीफ की एक महिला शिक्षक ने बताया कि वर्तमान में वह दुलहिनबाजार के एक

विद्यालय में पदस्थापित हैं। उनके फुलवारीशरीफ आवास से वर्तमान पदस्थापन वाले विद्यालय की दूरी तकरीबन 50 किलोमीटर हैं। अपनी जैसी चार-पांच शिक्षिकाओं के साथ एक गाड़ी ठीक कर वह सब विद्यालय आया-जाया करती हैं। लेकिन, उन्हें जो विद्यालय आवंटित हुआ है, वह बाढ़ से भी 10 किलोमीटर दूर है। इससे उनके आवास से आवंटित स्कूल की दूरी तकरीबन सौ किलोमीटर हो गई है। इससे मिलती-जुलती कहानी एक नेत्रहीन शिक्षक भी शिक्षा विभाग के गलियारों में सुनाते नजर दिखे। वर्तमान में उनका पदस्थापन वाला विद्यालय उनके आवास से पांच किलोमीटर पर है, लेकिन उन्हें आवंटित स्कूल उससे ज्यादा दूर हो गया है। इससे इतर ज्यादातर ऐसे शिक्षक हैं, जिन्हें वर्तमान पदस्थापन वाले विद्यालय से ज्यादा सुविधाजनक स्कूल आवंटित हुए हैं। ऐसे शिक्षकों की बल्ले-बल्ले है। ऐसे शिक्षकों का कहना है कि निकट में विद्यालय आवंटन होने से उन्हें आवागमन में आसानी हो गई है।

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