बोले मुजफ्फरनगर : शिक्षकों से हटे एडमिशन कराने की बाध्यता
बोले मुजफ्फरनगर : शिक्षकों से हटे एडमिशन कराने की बाध्यता
जनपद के बेसिक शिक्षा विभाग के कुल 951 विद्यालयों में करीब 5,200 शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें करीब 3,200 शिक्षक प्राईमरी विद्यालयों में और करीब 2,000 शिक्षक जूनियर हाईस्कूलों में कार्यरत हैं। बच्चों के एडमिशन को लेकर शासन का एक आदेश प्राईमरी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के गले की फांस बन गया है। दरअसल, शिक्षकों को विभाग द्वारा प्रतिवर्ष स्कूलों में दस प्रतिशत अधिक बच्चों के एडमिशन कराने व आधार कार्ड बनवाने की जिम्मेदारी दी गई है, जिसे पूरा करने में शिक्षकों के पसीने छूट रहे हैं। इसके साथ ही शिक्षक पुरानी पेंशन बहाली व पदोन्नति समेत अन्य सुविधाओं की भी मांग कर रहे हैं।
-------- शिक्षक मुजफ्फरनगर। जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग के कुल 951 परिषदीय विद्यालय हैं, इनमें 570 प्राईमरी, उच्च प्राथमिक विद्यालय 231 और कम्पोजिट विद्यालयों की संख्या 150 है। इन सभी स्कूलों में करीब 5,200 शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। इनमें प्राईमरी विद्यालयों में कार्यरत करीब 3,200 शिक्षक वर्तमान में विभाग के एडमिशन संबंधी नियमों से बेहाल हैं। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष बालेंद्र कुमार ने बताया कि शासन के आदेश हैं कि प्राईमरी विद्यालयों में अधिक से अधिक बच्चों के एडमिशन कराएं जाएं, जो गत वर्ष की कुल बच्चों की संख्या से दस प्रतिशत अधिक होने चाहिए। इसके लिए शासन ने बच्चों की आयु सीमा छह वर्ष निर्धारित की है, जिसके लिए बच्चे का आधार कार्ड भी अनिवार्य किया गया है। वहीं, वर्तमान समय में अधिकांश माता-पिता छह वर्ष की आयु पूरी करने से पहले ही अपने बच्चों का एडमिशन प्री-नर्सरी किड्स स्कूलों में करा देते हैं। इसके चलते विद्यालयों में बच्चों के एडमिशन का टारगेट पूरा करना असंभव हो जाता है। वहीं, जो अभिभावक शिक्षकों की मनुहार पर अपने बच्चों का एडमिशन प्राईमरी विद्यालयों में कराते भी हैं, उनके पास बच्चों का आधार कार्ड नहीं होता। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चे की जो जानकारी देते हैं, उसी आधार पर उनका एडमिशन कर लिया जाता है, लेकिन एडमिशन के बाद जब अभिभावक बच्चे का आधार कार्ड बनवाते हैं, उसमें दी गई जानकारी विद्यालयों में दर्ज जानकारी से भिन्न होती है।
इस स्थिति में विभाग द्वारा संबंधित शिक्षकों को ही बच्चे का आधार कार्ड सही तरीके से बनाने की भी जिम्मेदारी सौंप देते हैं, जिससे शिक्षकों का अधिकांश समय एडमिशन कराने वाले बच्चों के आधार कार्ड बनवाने अथवा उसमें आई त्रुटि ठीक कराने में ही निकल जाता है। वहीं, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संजीव बालियान ने बताया कि शिक्षकों की पुरानी पेंशन बहाली समेत कुछ अन्य समस्याएं भी हैं, जिन्हें शिक्षक संघ समय-समय पर उच्चाधिकारियों के समक्ष उठाता है, लेकिन उनका समाधान नहीं हो पा रहा है। इनमें मुख्यत: एक अप्रैल 2005 के बाद भर्ती होने वाले शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिए जाने, गर्मी के मौसम में विद्यालयों का समय बदलकर प्रात: सात बजे से अपराह्न 12 बजे तक किए जाने की मांग शामिल हैं। शिक्षकों के चयन वेतनमान में एक ही पद पर 12 वर्ष पूर्ण करने के पश्चात प्रोन्नत वेतनमान प्रदान किए जाने का नियम है, लेकिन वर्ष 2015 के बाद से आज तक शिक्षकों को कोई पदोन्नति लाभ नहीं दिया गया है। शिक्षकों के जनपदीय व अंतरजनपदीय स्थानांतरण किए जाने, सामान्य भविष्य निधि से अग्रिम आहरण, विभिन्न प्रकार के अनापत्ति प्रमाण पत्र के निर्गमन तथा मानव संपदा पोर्टल पर संशोधन अपडेशन संबंधी प्रकरणों का निस्तारण माड्यूल के माध्यम से किए जाने की भी मांग शिक्षक लंबे समय से कर रहे हैं। इसके साथ ही शासन द्वारा एक अप्रैल 2014 के बाद शिक्षकों को मिलने वाली सामूहिक बीमा की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है, जो गलत है।
शासन को सामूहिक बीमा के नाम पर लाखों शिक्षकों से की गई कटौती की धनराशि को वापस किए जाने और सामूहिक बीमा की प्रीमियम धनराशि दस लाख रुपये की जाानी चाहिए। शिक्षक नेता ने कहा कि यदि विभाग के साथ ही शासन भी शिक्षकों की इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए इनका निस्तारण कराए तो शिक्षक दूने उत्साह से अपने काम में जुट जाएगा, जिससे शिक्षा व्यवस्था की स्थिति में भी निश्चित सुधार आएगा। ----------- --- शिकायतें और सुझाव --- शिकायतें -- - प्राईमरी विद्यालयों में शासन द्वारा गत वर्ष से दस प्रतिशत अधिक बच्चों का एडमिशन कराने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर डाली गई है, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। - विद्यालयों में बच्चे के छह साल की आयु पूरी करने पर ही एडमिशन किए जाने की बाध्यता हटाई जानी चाहिए, इस नियम से एडमिशन का टारगेट पूरा करने में शिक्षकों के पसीने छूट रहे हैं। - एक अप्रैल 2005 के बाद भर्ती होने वाले शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था नहीं है, जिससे रिटायरमेंट के बाद शिक्षक व उसके परिजनों को जीवन-यापन में परेशानियां उठानी पड़ती है। - स्कूलों में काम कर रहे शिक्षकों को वर्ष 2015 के बाद से आज तक किसी तरह की पदोन्नति नहीं दी गई है, जिससे शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ------ सुझाव --- - प्राईमरी विद्यालयों में गत वर्ष से दस प्रतिशत अधिक बच्चों का एडमिशन कराने के नियम में आधार कार्ड की अनिवार्यता बाधक बन रही है। इसे अनिवार्यता से हटाया जाना चाहिए। - अधिकांश अभिभावक बच्चे का छह साल की उम्र से पहले ही प्री-नर्सरी स्कूलों में एडमिशन करा देते हैं। सरकारी स्कूलों में एडमिशन के लिए छह साल की आयु सीमा को कम किया जाना चाहिए। - एक अप्रैल 2005 के बाद भर्ती हुए शिक्षकों के लिए भी शासन को पुरानी पेंशन योजना को ही बहाल किया जाना चाहिए, ताकि रिटायरमेंट के बाद शिक्षकों को जीवन-यापन में परेशानी न हो। - चयन वेतनमान पर एक पद पर 12 साल से अधिक काम करने वाले शिक्षकों को नियमानुसार पदोन्नति दी जानी चाहिए, ताकि शिक्षक अपने कामकाज को लेकर उत्साहित रहें। --------- इन्होंने कहा --- - शिक्षकों द्वारा बताई गई समस्याओं का समाधान शासन स्तर से ही संभव है, जिसको लेकर शिक्षकों के मांग पत्र को शासन को भेजा जाएगा। वही जनपद में सात खंड शिक्षा अधिकारियों की तैनाती है, जबकि दस ब्लॉक होने के कारण व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए अतिरिक्त चार्ज दिए गए हैं। संदीप कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी ---------- - सरकार को पुरानी पेंशन बहाली को लेकर अहम निर्णय लेने चाहिए। गैर जनपद में स्थानांतरण के कारण शिक्षक अपने परिवार का ध्यान नहीं रख पाते हैं, विभाग को गैर जनपद में तैनात शिक्षकों को उनके गृह जनपद में ही नियुक्त करना चाहिए। बालेंद्र कुमार, जिलाध्यक्ष उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ---------- - एक अप्रैल 2014 के बाद शिक्षकों को मिलने वाली सामूहिक बीमा की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। सामूहिक बीमा के नाम पर लाखों शिक्षकों से की गई कटौती की धनराशि को सम्बन्धित शिक्षकों को वापस की जानी चाहिए। प्रवीण सिंह, महामंत्री, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ---------- - विद्यालय समय में परिवर्तन नहीं होने के कारण शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी होती है, पूर्व की तरह ही गर्मियों में विद्यालय का समय सात से 12 बजे तक किया जाना चाहिए। सुबोध देवी ---------- - विद्यालयों में एडमिशन के दौरान बच्चों की आयु सीमा छह वर्ष होने से काफी दिक्कतें होती है,
जिस कारण छात्रों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। रजनी ---------- - शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य करवाए जाते है, जिस कारण छात्र-छात्राओं की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। बावजूद इसके लंबे समय से शिक्षकों को पदोन्नति नहीं मिल रही है। पूनम बालियान ---------- - बच्चों के एडमिशन के दौरान आधार कार्ड की अनिवार्यता को खत्म किया जाना चाहिए, इससे अभिभावकों के साथ ही शिक्षकों को एडमिशन करने में काफी परेशानी होती है। वेदवती ---------- - गैर जनपद में स्थानांतरण के कारण शिक्षकाएं अपने परिवार का ध्यान नहीं रख पाती है, शिक्षिकाओं को उनके गृह जनपद में ही नियुक्ति मिलनी चाहिए। आरती सिंह ---------- - जनपदीय पारस्परिक स्थानान्तरण में भी अन्तर्जनपदीय स्थानान्तरण की तरह ही प्रधानाध्यापक,सहायक अध्यापक पूर्व माध्यमिक विद्यालय को एक दूसरे के साथ पारस्परिक स्थानान्तरण की व्यवस्था प्रदान की जानी चाहिए। लवी सिंह ---------- - गैर शैक्षणिक कार्य करवाए जाने के कारण छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होती है। लेकिन गैर शैक्षणिक कार्य करने के बाद भी शिक्षकों को पदोन्नति नहीं मिल रही है। अजीता रानी ---------- - शिक्षकों से कराए जाने वाले गैर शैक्षणिक कार्य पर रोक लगाई जानी चाहिए, ऑनलाइन कार्य के लिए अलग से कर्मचारियों की नियुक्ति विभाग को करनी चाहिए। पायल ---------- - पुरानी पेंशन बहाली को लेकर शिक्षक आंदोलनरत है, लेकिन सरकार द्वारा कोई अहम निर्णय नहीं लिया गया है।शिक्षकों के हित में निर्णय लेकर सरकार को पुरानी पेंशन बहाल करनी चाहिए। कोमल शर्मा ---------- - एडमिशन के दौरान आधार कार्ड की अनिवार्यता को खत्म किया जाना चाहिए, आधार कार्ड अनिवार्य होने के कारण विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या में कमी आ रही है। नितिन मोहन ---------- - खंड शिक्षा अधिकारी को दिए गए दो ब्लॉक का चार्ज हटाया जाना चाहिए,
अतिरिक्त ब्लॉक का चार्ज होने के कारण शिक्षकों को अपने कार्य कराने के लिए चक्कर काटने पड़ते है। सागर कुमार ---------- - शिक्षकों के हित में निर्णय लेकर सरकार को पुरानी पेंशन बहाल करनी चाहिए। पुरानी पेंशन बहाली को लेकर शिक्षक लगातार आंदोलनरत है। ---------- - दो ब्लॉक का चार्ज एक ही खंड शिक्षा अधिकारी को दिया जा रहा है, जिस कारण शिक्षकों को अपने कार्य कराने के लिए कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते है। जोगिंद्र कुमार ---------- - विद्यालयों में बच्चों के एडमिशन के दौरान आधार कार्ड अनिवार्य किया गया है, एडमिशन के दौरान आधार कार्ड की अनिवार्यता को समाप्त किया जाना चाहिए। पुष्पेंद्र चौधरी ---------- - ऑनलाइन कार्य के लिए अलग से कर्मचारियों की नियुक्ति होनी चाहिए, शिक्षकों से कराए जाने वाले गैर शैक्षणिक कार्य पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। विनोद कुमार ---------- - खंड शिक्षा अधिकारी को दो ब्लॉक का चार्ज दिया जा रहा है, जिस कारण शिक्षकों को अपने कार्य कराने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ते है। विनय कुमार ---------------
