राज्य के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को कक्षा प्रबंधन, शिक्षण रणनीति समेत कई विषयों पर ट्रेनिंग दी जा रही है। प्रशिक्षण के बाद जब वे स्कूल में पढ़ाना शुरू करेंगे तो उसकी मॉनिटरिंग की जाएगी। यदि शिक्षक मॉनिटरिंग में फेल होते होते हैं तो संबंधित विषय को उन्हें फिर से सिखाया जाएगा। यानी अगर शिक्षकों ने छात्रों को सही से नहीं पढ़ाया तो उन्हें दोबारा प्रशिक्षण दिया जाएगा। ट्रेनिंग के दौरान शिक्षकों ने क्या सीखा है, उसका कहां इस्तेमाल कर रहे हैं, शिक्षक-छात्र पर प्रभाव के बारे में जांच की जाएगी। साथ
ही शिक्षक-छात्रों की उपस्थिति, आधारभूत संरचना, शैक्षणिक, पाठ्य से संबंधित गतिविधियां, वर्ग संचालन की मॉनिटरिंग होगी। इसके आधार पर रिपोर्ट बनेगी। अध्यापक शिक्षा महाविद्यालय (सीटीई), जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय (पीटीईसी), प्रखंड अध्यापक शिक्षा संस्थान (बायट) के शिक्षक व प्राचार्य इन शिक्षकों की मॉनिटरिंग करेंगे।
दो स्कूलों से जोड़ा जाएगा
शिक्षकों की 6 दिवसीय ट्रेनिंग डायट, बायट, सीटीई, पीटीईसी हो रही है। प्रशिक्षण के दौरान वे मौखिक, लिखित जानकारी पाने के साथ-साथ प्रैक्टिकल भी करेंगे। इसके लिए उन्हें दो स्कूलों से जोड़ा जाएगा। ट्रेनिंग के आधार पर शिक्षक उन्हीं स्कूलों में छात्रों को पढ़ाएंगे। इस दौरान अधिकारी उनकी रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसके आधार पर रैंकिंग होगी।
प्रैक्टिकल के दौरान यदि शिक्षक छात्रों को सही तरीके से नहीं पढ़ाते हैं तो फिर से उनको ट्रेनिंग दी जाएगी।
कौशल विकास, डिजिटल उपकरण के प्रयोग की ट्रेनिंग
शिक्षकों को शिक्षण कौशल विकास के तहत कक्षा प्रबंधन, शिक्षण रणनीति, छात्रों के साथ प्रभावी ढंग से बातचीत करने के बारे में बताया जा रहा है। साथ ही कंप्यूटर, टैब, इंटरनेट के प्रयोग के बारे में बताया जाता है। ट्रेनिंग के दौरान ही शिक्षकों को शिक्षा नीतियों में होने वाले बदलाव, प्रारंभिक शिक्षक प्रशिक्षण, इन सर्विस प्रशिक्षण और विशेषज्ञता प्रशिक्षण दिया जाता है। स्कूलों से संबद्ध होने के बाद शिक्षक द्वारा ट्रेनिंग के दौरान सीखी गईं जानकारियों का तत्काल परीक्षण हो जाएगा। इससे शिक्षकों में कमी का भी पता चलेगा।
