सरकारी स्कूलों में छात्रों के होमवर्क की हर दिन जांच होगी, गलतियों पर विशेष ध्यान देंगे शिक्षक

 राज्य के सरकारी स्कूलों में छात्रों को मिलने वाले होमवर्क की रोज समीक्षा होगी। क्लास टीचर छात्रों को होमवर्क देंगे और दूसरे दिन उसकी जांच करेंगे। इस दौरान सवाल-जवाब, शब्द, लिखावट से जुड़ीं गलतियों की लिस्ट बनाई जाएगी। इसके बाद गलतियों पर विशेष ध्यान देते हुए उसे सिखाया जाएगा। अगर छात्र होमवर्क पूरा नहीं करता है तो शिक्षक उसका कारण जानेंगे। वे छात्र के माता-पिता से मिलकर समस्या दूर करने में सहयोग करेंगे। शिक्षा विभाग की योजना है कि छात्रों को क्लास के मुताबिक पाठ की जानकारी देना और सामाजिक ज्ञान देते हुए उनकी समझ को बढ़ाना है। इसके लिए शिक्षकों को 6 दिनों की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। जिसमें पढ़ने, पढ़ाने, लिखाने, छात्रों से बातचीत करने, होमवर्क सहित अन्य का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक स्कूलों की टाइमिंग सुबह 6:30 से 12:30 बजे तक की है। 7 बजे से क्लास शुरू हो जाएगी। जबकि 12:20 बजे छुट्टी होगी। 10 मिनट हेडमास्टर शिक्षकों के पढ़ाए जाने वाले विषय की समीक्षा करेंगे। साथ ही छात्रों से होमवर्क के बारे में पूछेंगे।



छात्रों को गर्मी से बचाव के लिए उपाय किए जा रहे


मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए शिक्षा विभाग छात्रों को गर्मी से बचाव के लिए उपाय कर रहा है। हर स्कूल में ठंडे पानी की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही स्कूलों में खराब पंखे, क्षतिग्रस्त खिड़की, दरवाजे की मरम्मत का निर्देश दिया गया है। जिन स्कूलों में चापाकल है, उसके पानी की जांच के के बाद आसपास में सफाई की व्यवस्था की गई है। शौचालय, परिसर की सफाई के साथ ही धूल से बचाव के लिए पानी का छिड़काव किया जाएगा।


शिक्षक को जिम्मेदारी, अधिकारी मॉनिटरिंग करेंगे


स्कूलों में साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय, परिसर की सफाई की जिम्मेदारी एक शिक्षक की होगी। स्कूल स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग हेडमास्टर करेंगे। इस दौरान यदि शिक्षकों की कमी होगी, तो इसकी जिम्मेदारी हेड मास्टर की होगी। प्रखंड स्तर पर शिक्षा विभाग के अधिकारी इसकी जांच करेंगे। जबकि मुख्यालय से नियुक्ति अधिकारी रैंडम जांच के बाद रिपोर्ट तैयार करेंगे। जिसके आधार पर स्कूलों में व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी।


सुधार किया जा रहा


• स्कूलों में बेहतर पढ़ाई के लिए लगातार सुधार किया जा रहा है। होमवर्क, रीडिंग के जरिए कोशिश है कि छात्रों को अधिक से अधिक जानकारी मिले और वह बोलचाल में भी बेहतर हों। स्कूल में साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय, परिसर, पर्यावरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे स्कूलों में पढ़ाई का माहौल रहेगा और छात्रों को भी जरूरत की चीजें मिलेंगी। - डॉ. एस. सिद्धार्थ, अपर मुख्य

सचिव, शिक्षा विभाग

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