ई-शिक्षा कोष में हाजिरी घोटाला, चार शिक्षकों को स्पष्टीकरण, फर्जी प्रमाण पत्र वाले शिक्षक पर केस

ई-शिक्षा कोष में हाजिरी घोटाला, चार शिक्षकों को स्पष्टीकरण, फर्जी प्रमाण पत्र वाले शिक्षक पर केस



ई-शिक्षा कोष से शिक्षकों की आनलाइन हाजिरी लगातार मुसीबत बनती जा रही है। कुछ शिक्षक इसे अनदेखा कर गलत तरीके से हाजिरी दर्ज कर रहे हैं, लेकिन विभागीय जांच में मामले पकड़ में आ रहे हैं। पिछले सप्ताह ही बांका से बाहर रहकर एक दर्जन शिक्षकों द्वारा हाजिरी दर्ज कराने का मामला सामने आया था। इसके बाद सभी शिक्षकों को स्पष्टीकरण जारी किया गया।

चार और शिक्षक पकड़े गए

बुधवार को फिर चार शिक्षक हाजिरी में गड़बड़ी करते पकड़े गए। डीपीओ स्थापना संजय कुमार यादव ने इन चारों के खिलाफ स्पष्टीकरण जारी किया है। मामले में फुल्लीडुमर के यूएमएस कदवारा राता की पूनम कुमारी और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय छत्रपाल की संगीता कुमारी ने दो मार्च 2026 को अपनी उपस्थिति बांका जिला सीमा से बाहर दर्ज की। इसके अलावा सात मार्च को अमरपुर प्रखंड के यूएमएस पाटकी और उच्च माध्यमिक विद्यालय सिकंदरपुर बौंसी के मु. वसी अख्तर ने बांका से बाहर हाजिरी दर्ज की। चारों शिक्षकों का वेतन अगले आदेश तक के लिए रोक दिया गया है। सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया गया है।



शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की निगरानी में कार्रवाई

बिहार में नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की निगरानी जांच के क्रम में बुधवार को एक और कार्रवाई सामने आई। प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय बभनगामा में कार्यरत शिक्षक गजेंद्र प्रसाद मंडल के खिलाफ जाली अंक-पत्र के आधार पर नौकरी पाने के आरोप में केस दर्ज किया गया। शिक्षक का नियोजन वर्ष 2008 में बीपीईडी के आधार पर हुआ था।

जाली अंक-पत्र की पुष्टि

निगरानी विभाग ने उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर से प्रमाणपत्र का सत्यापन कराया, जिसमें शिक्षक द्वारा दिखाए गए 605 अंक को जाली पाया गया। इसके अलावा, उच्च न्यायालय द्वारा दी गई स्वैच्छिक त्यागपत्र की अवधि के दौरान भी शिक्षक ने इस्तीफा नहीं सौंपा था।

कानूनी कार्रवाई शुरू

फर्जीवाड़ा पुष्टि होने के बाद बौंसी थाना में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन दिया गया। थानाध्यक्ष पंकज कुमार झा ने बताया कि केस गंभीरता से दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई के बाद बौंसी में हड़कंप मच गया है और फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी कर रहे अन्य शिक्षकों की भी सांसें अटक गई हैं।

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