BPSC शिक्षकों के सातवें पे कमीशन के अनुरूप वेतन की कानूनी लड़ाई

 📢 BPSC शिक्षकों के सातवें पे कमीशन के अनुरूप वेतन की कानूनी लड़ाई 


साथियों एवं सम्मानित नागरिकों,

माननीय पटना उच्च न्यायालय में लंबित हमारी याचिका में हमने सरकार के काउंटर एफीडेविट का निम्न संवैधानिक एवं विधिक आधारों पर जवाब दायर किया है, ताकि स्पष्ट हो सके कि हम किन मुद्दों पर न्याय की मांग कर रहे हैं:


⚖️ 1️⃣ अनुच्छेद 14 एवं 16 का उल्लंघन (समानता का अधिकार)-

BPSC से नियुक्त नियमित राज्यकर्मियों को अन्य राज्यकर्मियों से अलग वेतन ढांचे में रखना मनमाना एवं भेदभावपूर्ण है, जबकि कार्य, योग्यता और दायित्व समान हैं।


⚖️ 2️⃣ 7वें वेतन आयोग (7th CPC) का वैधानिक अधिकार-

वित्त विभाग के संकल्प 3590/2017 के अनुसार 01.01.2016 के बाद नियुक्त प्रत्यक्ष भर्ती राज्यकर्मियों पर 7th CPC लागू है। BPSC शिक्षक इस श्रेणी में आते हैं, अतः पे मैट्रिक्स से बाहर रखना विधि विरुद्ध है।


⚖️ 3️⃣ नियमित राज्य सेवा का दर्जा-

BPSC एक संवैधानिक निकाय है; हमारी भर्ती राज्यस्तरीय परीक्षा से हुई, हम राज्य स्तर पर स्थानांतरणीय सेवा में हैं और सरकारी सेवा नियमों यथा सरकारी सेवक वर्गीकरण 2005 एवं बिहार सरकारी सेवक आचरणके संहिता 1976 के अधीन कार्य करते हैं — इसलिए अलग वेतन व्यवस्था अनुचित है।


⚖️ 4️⃣ Fitment Matrix की मनमानी-

बिना स्पष्ट नीति, कैबिनेट निर्णय या वित्तीय औचित्य के की हमको सातवें वेतनमान के अनुसार पे लेवल से अलग क्यों रखा जाएगा एक अलग वेतन ढांचा लागू करना न्यायिक समीक्षा योग्य है।


⚖️ 5️⃣ ‘नियोजित शिक्षक’ मामलों का गलत संदर्भ-

स्थानीय निकाय के संविदा शिक्षकों से संबंधित निर्णय BPSC के नियमित शिक्षकों पर लागू नहीं होते — दोनों कैडर भिन्न हैं।


⚖️ 6️⃣ कैरियर प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव-

पे मैट्रिक्स से बाहर रखने से पदोन्नति, उच्च पदों की पात्रता और सेवा लाभ प्रभावित हो रहे हैं।


⚖️ 7️⃣ नवोदय विद्यालय (NVS) संदर्भ — समान अवसर से वंचित करना

नवोदय विद्यालय समिति में PGT/Principal/Vice-Principal जैसे पदों के लिए निर्धारित Pay Level (7th CPC) में सेवा आवश्यक होती है। BPSC शिक्षकों को Pay Matrix से बाहर रखने के कारण वे इन राष्ट्रीय अवसरों के लिए अयोग्य हो जाते हैं, जो समान अवसर (Article 16) के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव का स्पष्ट उदाहरण है।


⚖️ 8️⃣ वैधानिक अपेक्षा (Legitimate Expectation)

प्रतियोगी परीक्षा से नियुक्ति के समय यह न्यायोचित अपेक्षा थी कि अन्य राज्यकर्मियों की तरह समान वेतन संरचना मिलेगी; बाद में अलग व्यवस्था लागू करना इस सिद्धांत के विपरीत है।


👉 हमारी लड़ाई केवल वेतन की नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार, सेवा सम्मान और समान अवसर की है।


— आलोक श्रीवास्तव 

अध्यक्ष, बिहार माध्यमिक विद्यालय अध्यापक संघ

संस्थापक, बिहार टीचर्स सेल्फ सपोर्ट टीम

मोबाइल नंबर 9097638777

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