प्राइवेट स्कूलों में सरकारी पैसे से पढ़ने वाले बच्चे छू रहे आसमान
राज्य में शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के तहत प्राइवेट स्कूलों में सरकारी पैसे से पढ़ रहे बच्चे पढ़ाई में आसमान छू रहे हैं। इस कानून के तहत पिछले 14 वर्षों में प्राइवेट स्कूलों में लाखों बच्चों को दाखिला मिला है। इसके प्रति अभिभावकों में आयी अभिभावक की वार्षिक आय एक लाख रुपये तक हो, से है। कमजोर वर्ग के बच्चों का तात्पर्य सभी जातियां-समुदाय के बच्चे, जिनके माता-पिता या वैधानिक अभिभावक की वार्षिक आय दो लाख रुपये से कम हो, से है। इसी प्रकार अनाथ बच्चे से अभिप्रेत है, जिनके माता-पिता नहीं हैं। शिक्षा का अधिकार कानून जागरूकता का ही नतीजा कहेंगे कि इस साल 84,806 बच्चों ने नामांकन के लिए आवेदन किया है।
25 फीसदी सीट पर दाखिले को 84,806 बच्चों ने किया आवेदन
शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1) (सी) एवं बिहार राज्य बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा नियमावली, 2011 के तहत प्रस्वीकृति प्राप्त निजी विद्यालयों में 25 फीसदी सीटों पर कमजोर वर्ग एवं अलाभकारी समूह के बच्चों के दाखिले की व्यवस्था है। अलाभकारी समूह के बच्चों का तात्पर्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ट्रांसजेंडर सहित) एवं अल्पसंख्यक समूह, जिनके माता-पिता या वैधानिक
(आरटीई) के तहत राज्य के प्रस्वीकृत प्राइवेट स्कूलों में 25 फीसदी सीटों पर जिन बच्चों का निःशुल्क दाखिला एवं निःशुल्क पढ़ाई होती है, उन बच्चों के शुल्क की राशि की प्रतिपूर्ति संबंधित प्राइवेट स्कूलों को राज्य सरकार द्वारा की जाती है। यह व्यवस्था राज्य में वर्ष 2011-12 से चल रही है। इस व्यवस्था के तहत दाखिले के लिए अब ज्ञानदीप पोर्टल के माध्यम से आवेदन लेने से लेकर दाखिला दिलाने तक की ऑनलाइन व्यवस्था है।
इस कानून को लेकर अभिभावकों में आयी जागरूकता का पता इस बात से चलता है कि वर्ष 2024-25 में 28 हजार बच्चों का दाखिलाहुआ था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़ कर 43 हजार पर पहुंच गया। इससे इतर इस बार वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 में प्रस्वीकृति प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में 1 ली कक्षा में दाखिले के लिए 84,406 बच्चों द्वारा आवेदन किये गये हैं। जिलावार देखें, तो अररिया के 1,205, अरवल के 771, औरंगाबाद के 1,845, बांका के 1,755, बेगूसराय के 3,812, भागलपुर के 1,542, भोजपुर के 1,931, बक्सर के 1,111, दरभंगा के 2,421, गयाजी के 9,373, गोपालगंज के 572, जमुई के 1,877, जहानाबाद के 3,380, कैमूर के 1,394, कटिहार के 690, खगड़िया के 3,763, किशनगंज के 400, लखीसराय के 1,315, मधेपुरा के 1,094, मधुबनी के 2,191, मुंगेर के 1,439, मुजफ्फरपुर के 2,927, नालंदा के 2,350, नवादा के 2,504, पश्चिमी चंपारण के 1,676, पटना के 4,909, पूर्वी चंपारण के 1,311, पूर्णिया के 1,004, रोहतास के 3,569, सहरसा के 1,792, समस्तीपुर
