अंडे की बढ़ी कीमत से मध्याह्न भोजन प्रभावित, बच्चों को दिया जा रहा केला
ठंड के मौसम में अंडे की कीमतों में वृद्धि का असर अब सरकारी स्कूलों की मध्याह्न भोजन योजना पर पड़ने लगा है। हर शुक्रवार को बच्चों को मिलने वाले अंडे की जगह अब उन्हें केले दिए जा रहे हैं। मध्य और प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों (एचएम) के अनुसार, बाजार में एक कैरेट अंडे (30 पीस) की कीमत 240 से 250 रुपये तक पहुंच गई है। इस हिसाब से एक अंडे की कीमत आठ से नौ रुपये के बीच है। ग्रामीण इलाकों में यह नौ रुपये तक है। दिसंबर महीने से दाम में यह बढ़ोतरी देखी जारही है, जबकि गर्मी के दिनों में अंडे की कीमत घट जाती है। इस स्थिति को देखते हुए
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शिक्षा विभाग के मध्याह्न भोजन योजना निदेशालय ने अंडों की दर जनवरी और फरवरी महीने के लिए छह रुपये प्रति अंडा तय की है। मार्च से दिसंबर तक यह दर पांच रुपये ही रहेगी। योजना निदेशक विनायक मिश्रा के अनुसार, अंडों पर खर्च होने वाली अतिरिक्त राशि को उपलब्ध फंड से ही समायोजित किया जाएगा। निदेशक द्वारा जारी पत्र में कहा
गया है कि हर शुक्रवार बच्चों को एक अंडा या एक मौसमी फल दिया जाएगा। अधिकांश स्कूलों ने 25 से 30 रुपये प्रति दर्जन की दर से केले खरीदकर विद्यार्थियों में वितरित किए। खरीक प्रखंड के एक प्रधानाध्यापक ने बताया कि आठ जनवरी के बाद स्कूल खुलने पर अंडे के वितरण के लिए एमडीएम फंडसे ही राशि समायोजित करनी होगी।
अंडों की आपूर्ति स्कूलों के एचएम के लिए बड़ी चुनौती
जिले के सरकारी विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के लगभग 3.66 लाख विद्यार्थी मध्याह्न भोजन योजना के लाभार्थी हैं। इनमें से कुछ बच्चे धार्मिक या व्यक्तिगत कारणों से अंडा नहीं खाते, उन्हें आमतौर पर केला दिया जाता है। बावजूद इसके, हर शुक्रवार को साढ़े तीन लाख के करीब अंडों की आपूर्ति स्कूलों के एचएम के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है
