आत्म-मूल्यांकन सिस्टम होगा लागू

 आत्म-मूल्यांकन सिस्टम होगा लागू



अब सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को सिर्फ बच्चों का मूल्यांकन ही नहीं करना होगा, बल्कि हर दिन अपनी पढ़ाने की शैली और कक्षा संचालन का आत्म-मूल्यांकन भी करना पड़ेगा। "क्या आज बच्चों ने कक्षा में खुलकर सवाल पूछे ?", "क्या शांत रहने वाले बच्चों पर पर्याप्त ध्यान दिया?", "क्या पाठ को वास्तविक जीवन के उदाहरणों से जोड़ा?"- ऐसे सवाल अब कटिहार जिले के हर शिक्षक की रोजमर्रा की चेकलिस्ट का हिस्सा बनेंगे।

विद्यालयों में शैक्षणिक माहौल सुधारने और पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से माध्यमिक शिक्षा के डीपीओ रवि रंजन ने जिले के सभी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत प्रत्येक शिक्षक के लिए एक विशेष 'स्व-मूल्यांकन चेकलिस्ट'



तैयार करना अनिवार्य किया गया है। इसी के आधार पर शिक्षक अपनी कक्षा लेंगे और यह दर्ज करेंगे कि उन्होंने शिक्षण के दौरान किन-किन बिंदुओं पर काम किया। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से कक्षाओं में बच्चों की सक्रिय भागीदारी बढ़ेगी और शिक्षक भी अपनी कमजोरियों और खूबियों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। हाल के निरीक्षणों में जिन विद्यालयों में शैक्षणिक माहौल अपेक्षाकृत कमजोर पाया गया

था, वहां सुधार लाने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है। इसके साथ ही प्रत्येक शिक्षक को अपने विषय का स्टडी कोर्स मटेरियल (एससीएम) तैयार करना भी अनिवार्य किया गया है, ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ रिवीजन में सुविधा मिल सके। विद्यालय प्रमुखों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि सभी शिक्षक नियमित रूप से अपनी पाठ्यटीका (टीचिंग डायरी) भरें और उसकी लगातार निगरानी करें।

शिक्षक की कमी से पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिएः डीपीओ


डीपीओ के निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि शिक्षक की कमी के कारण किसी भी कक्षा की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए। जहां 11वीं-12वीं में शिक्षक नहीं हैं, वहां माध्यमिक कक्षा के शिक्षक कक्षा लेंगे, जबकि माध्यमिक स्तर पर कमी होने की स्थिति में 11वीं-12वीं के शिक्षक पढ़ाएंगे। इसके अलावा विद्यालयों में पुस्तकालय गतिविधियां, सामाजिक-भावनात्मक शिक्षण, कौशल आधारित शिक्षा और परामर्श सत्र आयोजित करने पर भी जोर दिया गया है। शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि आत्म-मूल्यांकन की यह व्यवस्था न सिर्फ शिक्षकों की कार्यशैली में सुधार लाएगी, बल्कि छात्रों को भी बेहतर और रुचिकर शिक्षण का अनुभव मिलेगा।
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