असली शिक्षिका गायब, नकली महिला पहुंच गई आवासीय प्रशिक्षण लेने — बायोमेट्रिक जांच में फूटा फर्जीवाड़े का भांडा
समस्तीपुर।
बिहार के समस्तीपुर जिला मुख्यालय स्थित एक बीएड कॉलेज में आयोजित पाँच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण के दौरान एक गंभीर फर्जीवाड़ा सामने आया है। प्रशिक्षण में शामिल होने पहुँची एक महिला को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जो असल शिक्षिका की जगह फर्जी तरीके से प्रशिक्षण लेने पहुँची थी।
जानकारी के अनुसार, प्रशिक्षण के दौरान जब बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज की जा रही थी, तभी संबंधित महिला की पहचान में गड़बड़ी सामने आई। बायोमेट्रिक मिलान नहीं होने पर कॉलेज कर्मियों को संदेह हुआ और पूछताछ शुरू की गई। पूछताछ में स्पष्ट हुआ कि महिला किसी अन्य शिक्षिका के स्थान पर प्रशिक्षण लेने पहुँची है।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. पवन सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों एवं स्थानीय थाना को सूचना दी। सूचना पर पहुँची मुफस्सिल थाना पुलिस ने महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
गिरफ्तार महिला की पहचान मुफस्सिल थाना क्षेत्र के लगुनिया रधुकंठ निवासी कृष्णा कुमार की पत्नी सोनी कुमारी के रूप में की गई है। पुलिस जांच में सामने आया कि विभूतिपुर प्रखंड के प्राथमिक उर्दू विद्यालय आलमपुर में पदस्थापित शिक्षिका हीना परवीन को इस पाँच दिवसीय प्रशिक्षण में शामिल होना था, लेकिन उन्होंने स्वयं न जाकर पैसों का लालच देकर एक गैर-शिक्षिका को अपनी जगह भेज दिया।
नगर थानाध्यक्ष अजीत प्रसाद सिंह ने बताया कि कॉलेज प्राचार्य की शिकायत पर महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए कॉलेज प्राचार्य से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आरोपित शिक्षिका के विरुद्ध निलंबन की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
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✍️ शिक्षक समाज बिहार की स्पष्ट अपील
इस तरह की घटनाएँ पूरे शिक्षक समाज को शर्मसार करती हैं। कुछ स्वार्थी और गैर-जिम्मेदार लोगों की वजह से ईमानदारी से कार्य कर रहे हजारों शिक्षकों की छवि पर सवाल उठता है। समाज की नजरों में शिक्षक जैसे पवित्र पेशे पर संदेह पैदा होता है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
शिक्षक समाज बिहार यह मांग करता है कि—
• ऐसे मामलों में कठोरतम कार्रवाई हो
• दोषी शिक्षकों को उदाहरणात्मक दंड दिया जाए
• प्रशिक्षण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और सख्ती और बढ़ाई जाए
शिक्षक केवल नौकरी नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी और समाज निर्माण का दायित्व है। इसे मज़ाक और सौदेबाज़ी का माध्यम न बनने दिया जाए।
