अब ई-सर्विस बुक में दर्ज होंगे शिक्षकों के रिकार्ड

 अब ई-सर्विस बुक में दर्ज होंगे शिक्षकों के रिकार्ड




पटना : नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के क्रियान्वयन में जुटी राज्य सरकार सभी शिक्षकों को ई-सर्विस बुक की सुविधा मुहैया कराने की तैयारी में है। इस सुविधा से राज्य के 81,223 सरकारी विद्यालयों के तकरीबन छह लाख शिक्षकों को लाभ मिलेगा। चूंकि यह स्कीम बिहार विधानसभा चुनाव से पहले अगस्त में प्रस्तावित की गई थी, अब शिक्षकों को ई-सर्विस बुक उपलब्ध कराने को लेकर शिक्षा विभाग ने प्रस्तावित स्कीम पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। इस प्रक्रिया में शिक्षकों के व्यक्तिगत और सेवा से संबंधित सभी रिकार्ड जैसे शैक्षिक योग्यता, नियुक्ति, संपुष्टि, सेवा संबंधी जानकारी, वेतन निर्धारण, प्रोन्नति

और स्थानांतरण एवं सेवानिवृत्ति की तिथि संबंधी रिकार्ड आनलाइन दर्ज किए जाएंगे। शैक्षणिक प्रमाण पत्र, पुरस्कार और अवकाश जैसी सभी जानकारी को भी ई-सर्विस बुक का हिस्सा बनाया जाएगा।

शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ई-सर्विस

बुक स्कीम सभी संवर्ग के शिक्षकों के लिए लागू होगी। बिहार लोक सेवा आयोग की चयन परीक्षा और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित सक्षमता परीक्षा के लिए आवेदन करते समय अपलोड किए गए सभी प्रमाण पत्र और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज ई-सर्विस बुक का हिस्सा होंगे। शिक्षा विभाग का मानना है कि ई-सर्विस बुक प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाएगी और यह सुनिश्चित करेगी कि सभी जानकारी सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध हो। तबादले के बाद शिक्षकों का बायोमीट्रिक आधारित आधार सत्यापन करने में मदद मिलेगी। किसी भी प्रकार जालसाजी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। खास बात यह कि शिक्षकों को ई-सर्विस बुक की सुविधा उपलब्ध कराने के मामले में बिहार देश का

तीसरा राज्य होगा। अभी हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एसआरएमएस) पोर्टल के माध्यम से शिक्षकों के लिए ई-सर्विस बुक का उपयोग किया जा रहा है।

पुस्तकालयाध्यक्षों तथा कर्मचारियों को भी मिलेगा ई-सर्विस बुक का लाभ: ई-सर्विस बुक की सुविधा सभी शिक्षकों के अलावा पुस्तकालयाध्यक्षों तथा कर्मचारियों के लिए भी लागू की जाएगी। इसमें 71,863 प्रारंभिक (40,566 प्राथमिक, 31,297 मध्य) और 9,360 माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक विद्यालयों में एकसमान रूप से लागू होगी। ई-सर्विस बुक का उद्देश्य यह है कि किसी भी पदाधिकारी द्वारा किसी भी स्तर पर शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का अवलोकन किया जा सके। इससे फर्जी दस्तावेजों को पकड़ने में भी मदद मिलेगी।
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