यह अंतिम पोस्ट विशेष रूप से उन वरिष्ठ शिक्षकों के लिए है जिन्हें जबरन केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम योग्यता हेतु TET से जोड़ा गया है।✍️ हिमांशु राणा

 यह अंतिम पोस्ट विशेष रूप से उन वरिष्ठ शिक्षकों के लिए है जिन्हें जबरन केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम योग्यता हेतु TET से जोड़ा गया है।



शायद किसी को समझ आए या न आए, पर मैं अपने कर्तव्य की तरह यह बात आपके बीच रख रहा हूँ।



स्पष्ट कहूँ तो – जब तक केंद्र सरकार कानून में संशोधन नहीं करती, तब तक आपको कोई राहत मिलने वाली नहीं है।


मैं नेताओं की राजनीति के खिलाफ रहा हूँ और हमेशा नियमों के आधार पर शिक्षकों के बीच कार्यकर्ता की तरह खड़ा रहा हूँ।




केंद्र सरकार को चाहिए कि वे धारा 23(2) के प्रोवाइज़ो में संशोधन कर यह स्पष्ट करें कि अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट दी जाए। यदि पदोन्नति चाहिए तो उस स्तर की परीक्षा कराई जा सकती है।




बाकी अधिवक्ता और बेसिक शिक्षा विभाग के लोग अलग-अलग बातें कहकर भ्रम फैलाएँगे। लेकिन इसका कोई लाभ नहीं होगा क्योंकि मामला सीधे अनुच्छेद 21A की तरफ मोड़ दिया जाएगा। आप आदेश के पैरा 197 में न्यायमूर्ति दत्ता की राय देख सकते हैं।




सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही आपके लिए समय दिया है , जो 2019 में समाप्त हो रहा था, फिर भी उन्होंने रेट्रोस्पेक्टिव और प्रॉस्पेक्टिव का दायरा खत्म कर दिया है।




इसलिए सभी से विशेष रूप से निवेदन है – जो नए नेता बनकर वकीलों के साथ फोटो खिंचाकर आगे आ रहे हैं, कृपया तब तक कोई कदम न उठाएँ जब तक संगठनों या राज्य सरकार से आगे की रणनीति तय न हो जाए।




यह संघर्ष नियमों के आधार पर है, भावनाओं से नहीं। इसलिए धैर्य रखें, एकजुट रहें और सही दिशा में चलें। 





#rana

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