शिक्षकों का दर्जा तो बदला, पर तीन महीने से नहीं मिला वेतन
मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। शिक्षकों का दर्जा तो बदला, लेकिन तीन महीने से उन्हें वेतन नहीं मिल रहा है। 56 हजार शिक्षकों को मई से वेतन का इंतजार है। वेतन नहीं लेने के कारण शिक्षकों को उधार लेना पड़ रहा है। मुजफ्फरपुर समेत अलग-अलग जिलों में शिक्षक इसको लेकर शिक्षा विभाग के कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं।
जिले समेत सूबे में विशिष्ट शिक्षक और बीपीएससी तीसरे चरण के शिक्षकों का यह मामला है। सूबे में इन शिक्षकों की संख्या 59 हजार है। इनमें से ढाई हजार शिक्षकों को ही मई और जून का वेतन मिला है। वहीं, अब तक 20275 शिक्षकों का ही एचआरएमएस पर ऑनबोर्डिंग हुआ है। शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने में मुजफ्फरपुर समेत 18 जिले शून्य वाली स्थिति में है। सबसे अधिक ऑनबोर्डिंग शिवहर में, जिले में 43 फीसदी :
शिक्षा विभाग की समीक्षा में सामने आया है कि सूबे में सबसे अधिक ऑनबोर्डिंग शिवहर जिले में हुआ है। इस जिले में 80 फीसदी शिक्षकों का ऑनबोर्डिंग हो गया है। समीक्षा रिपोर्ट में बताया गया है कि मुजफ्फरपुर में 43 फीसदी शिक्षकों का ऑनबोर्डिंग हुआ है। लेकिन, वेतन किसी को नहीं मिला है। कई जिलों में 10 तो कहीं 20 फीसदी से कम शिक्षकों का ऑनबोर्डिंग हुआ है। मधुबनी में एक
फीसदी, पटना में 13 फीसदी, जमुई में आठ फीसदी का ऑनबोर्डिंग हुआ है। वहीं, सुपौल में 11 तो सीवान में 15 फीसदी का हुआ है। समस्तीपुर में 10 तो औरगांबाद में अब तक एक भी शिक्षक का ऑनबोर्डिंग नहीं हुआ है।
जिनका ऑनबोर्डिंग हो चुका, उनको भी नहीं मिल रहा है वेतन
जिले में 947 शिक्षक का ऑनबोर्डिंग हो चुका है, लेकिन बीते तीन महीने से एक को भी वेतन नहीं मिला है। दरभंगा, पूर्वी चंपारण जहां 16 से 20 फीसदी शिक्षक का ऑनबोर्डिंग हा चुका है, वहां भी अब तक एक भी शिक्षक को वेतन नहीं मिला है। बेगूसराय में 73 फीसदी शिक्षक का ऑनबोर्डिंग हो चुका है, पर वेतन नहीं जारी हुआ है। ऑनबोर्डिंग होने वाले 43 फीसदी शिक्षकों में से वेतन महज 13 फीसदी को ही वेतन मिल पाया है। अधिकारियों के अनुसार अभी अधिकांश जिलों में डीईओ बदले गए हैं। ऐसे में नए डीईओ की आईडी, हस्ताक्षर को लेकर मामला लटका है।
किसी को भरनी है बेटे के कॉलेज की फीस तो किसी का नामांकन लटका
बोचहां की शिक्षिका ने बताया कि वेतन नहीं मिलने के कारण बेटे की पढ़ाई पर ग्रहण लगा है। बैंग्लुरू में बेटे का नामांकन कराना है। अंतिम तिथि निकल चुकी है। है। कॉलेज से हमलोगों ने समय मांगा था। लगा था कि जून में हो जाएगा, लेकिन अब जुलाई भी खत्म होने को है। पैसे के कारण बेटे का साल बर्बाद नहीं हो, इसलिए उधार की जुगत में है। वहीं, कई शिक्षकों ने बताया कि वेतन नहीं मिलने के कारण वे अपने बच्चों के कॉलेज की फीस भी नहीं भर पा रहे हैं। यह पीड़ा दर्जनों शिक्षकों की है जिनका परिवार इसी वेतन पर आश्रित है।
