तबादले पर शिक्षकों में कहीं खुशी तो कहीं गम

 तबादले पर शिक्षकों में कहीं खुशी तो कहीं गम

पटना, । बीमारी से लेकर दूरी के आधार पर तबादला पाने वाले राज्य के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कहीं खुशी तो कहीं गम देखी जा रही है। शिक्षकों में कुछ बेहद खुश हैं, तो कुछ शिक्षक दुखी भी हो गए हैं।




जिन शिक्षकों और शिक्षिकाओं को मन अनुकूल विद्यालय नहीं मिले हैं, वे अब तबादला स्थगित कराने या इच्छानुसार स्कूल पाने के लिए शिक्षा विभाग का चक्कर लगा रहे हैं। शुक्रवार को शिक्षा विभाग में ऐसे कई शिक्षक शिकायत लेकर पहुंचे 


मनोनुकूल विद्यालय नहीं मिलने पर शिक्षा विभाग का चक्कर लगा रहे शिक्षक


घर से ज्यादा दूर नौकरी करने वाले शिक्षक नजदीक आ जाने से हैं खुश


तबादला संबंधी शिकायत लेकर पहुंच रहे शिक्षकः तबादला संबंधी शिकायत लेकर शिक्षा विभाग पहुंची एक शिक्षिका ने बताया कि पहले वे भोजपुर के एक स्कूल में पदस्थापित थीं। पति के पदस्थापना के आधार पर उन्होंने पटना नगर निकाय और दानापुर नगर परिषद के स्कूल में तबादला के लिए विकल्प दिया था, लेकिन उन्हें पटना के मसौढ़ी के एक स्कूल में स्थानांतरित कर दिया है। भोजपुर के स्कूल में जाने की तुलना में मसौढ़ी जाना ज्यादा कठिन हो गया है।


पोर्टल से तबादला संबंधी ले रहे हैं पत्र

गुरुवार को 26 हजार शिक्षकों को तबादले के बाद स्कूल दिखने लगा है। ई-शिक्षा कोष पोर्टल के माध्यम से शिक्षक तबादला संबंधी पत्र ले रहे हैं। काफी शिक्षक सोशल मीडिया के माध्यम से तबादला को लेकर खुशी और दुख जता रहे हैं। शिक्षकों के भी विभिन्न ग्रुप पर भी इस तरह की खूब चर्चा हो रही है। शिक्षकों ने सोशल मीडिया पर शिक्षा विभाग का आभार प्रकट किया।

इसी तरह का मामला मधुबनी के शिक्षक के साथ भी हुआ है। जिले के अंदर ही तबादला के लिए एक शिक्षक ने आवेदन यह सोचकर दिया कि आवास के और नजदीक के स्कूल में आ जाएंगे। तबादला के पहले स्कूल की दूरी आवास से लगभग सात किलोमीटर थी, लेकिन तबादले के बाद अब दूरी 15 किलोमीटर से अधिक हो गई है। उन्होंने बताया कि इससे उनकी परेशानी और भी बढ़ गई है।


कई घर के पास भी पहुंचेः

ऐसे शिक्षकों ने खुशी जताई है, जो अपने घर से पहले 300 से 350 किलोमीटर की दूरी वाले स्कूल में थे और तबादला के बाद अब तीन से सात किलोमीटर के अंदर वाले स्कूल में आ गए हैं।

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