मुख्य सचिव से अनचाहे गर्भ समापन की गाइडलाइंस के साथ हलफनामा मांगा

 मुख्य सचिव से अनचाहे गर्भ समापन की गाइडलाइंस के साथ हलफनामा मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश शासन के मुख्य सचिव से अनचाहे गर्भ के समापन की अनुमति देने में देरी की बजाय त्वरित कार्रवाई की गाइडलाइंस के साथ हलफनामा मांगा है। साथ ही सुझाव मांगा है कि गर्भ समापन पर मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर अनुमति देने हो रही देरी कम कैसे हो



कोर्ट ने कहा कि यह समझ से परे है कि दो मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पक्ष में होने के बावजूद अदालत ने गर्भ गिराने की अनुमति अर्जी निरस्त कर दी जबकि अनचाहा गर्भ का हर दिन कीमती है, तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। इसे लटकाए रखना पीड़िता के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा हो सकता है। कोर्ट ने कहा अदालत ने संवेदनहीनता का परिचय दिया और कानून समझने में गलती की।

कोर्ट ने बागपत की रेप पीड़िता के अनचाहे गर्भ की समाप्ति की अनुमति के लिए सीएमओ मेरठ को चार विशेषज्ञ डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड गठित करने और हर पहलू पर विस्तृत जांच कर 24 घंटे में मेडिकल रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज मेरठ के प्राचार्य को इस जांच में पूरा सहयोग देने और डीएम मेरठ को पीड़िता के परिवार के मेरठ आने व ठहरने का खर्च उठाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पीड़िता याची को मेडिकल बोर्ड के समक्ष जांच के लिए उपस्थित होने का आदेश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति एमके गुप्ता एवं न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की खंडपीठ ने पीड़िता की मां द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में एडीजे/विशेष जज पॉक्सो एक्ट बागपत द्वारा अनचाहा गर्भ गिराने की अनुमति देने से इनकार करने को चुनौती दी गई है।

बागपत के सिंघावली अहीर थान क्षेत्र में नाबालिग रेप पीड़िता की मां ने घटना की एफआईआर दर्ज कराई है।17 साल की पीड़िता ने अनचाहा गर्भ गिराने की अनुमति के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की। सीएमओ रिपोर्ट में गर्भ 20 सप्ताह से कम बताया गया और कहा गया कि डॉक्टर द्वारा एमटीपी एक्ट के तहत गर्भ समापन हो सकता है। अदालत ने मेडिकल बोर्ड से दोबारा जांच रिपोर्ट मांगी। वह भी पक्ष में रही। इसके बावजूद अर्जी निरस्त कर दी गई।

Previous Post Next Post